. *उचित श्रद्धांजली*
उस बहना के
सातों अंगों में
छेडखानी करके
उसे नरक यातना
देने वाले नरपशू...
पशू भी ऐसा
दर्दनाक व्यवहार करते है
ऐसा मैंने सुना नही
यह उनको भी
गाली लगेगी
तो क्या कहू तुम्हें?
शैतान... नरकंकाल...
या दानव...
नहीं यह भी विशेषण
तुम्हारे लिए
उचित नहीं होंगे
हमें नया विशेषण
ढुँढना होगा...
तुम ऐसी
भटकती आत्माऐं हो
जो अपनी जन्मदात्री पर
ऐसे ही अत्याचार
करनेवालों के
प्रतिशोध में संसार में
घुमनेवाली
लेकिन यह प्रतिशोध
नही था
यह था केवल...
और केवल अत्याचार
जैसा किसीने
सोचा भी नही होगा
तुम्हारी वासनाओंका
शिकार बना दिया
तुमने उस असहाय
देवता को
तुम्हारे मन में
रत्तीभर भी इन्सानियत
होती तो...
तो शायद ऐसा दुष्कर्म
नही होता
जिसका दूध पीकर
तुम पले-पोसे थे
उक माताके उपकारोंको
भूलकर हैवान
बन गए तुम
अब बात सजा की है
तो...
तुम्हे फाँसी की सजा
दी जाए
तो कुछ घंटोमें
या क्षणों में
छुटकारा पाओगे
यह हमें मंजूर नहीं
आजन्म कारावास
दिया जाए तो
लाख बहानें बनाकर
तुम्हे छुडवाने के लिए
सैंकडों काले कौए
धन की लालच
दौडते आयेंगे
नहीं तो किसी
लालची नेता की
मेहरबानी से
या अस्तीन में रहनेवाले
कर्मी को चीट-चिरगुट दे कर
कारा में भी
ऐश मनाओंगे
उस वक्त तुम्हे
न याद आयी धर्मपत्नी
न बाल बच्चे
न भाई-बहना
न माता पिता
न और कोई
ऐसी कौनसी नशा के
हवी हो गए थे तुम?
तुम्हे ऐसा ही
छोड दिया जाए
तो तुम अपने जैसी
संतान पैदा करते रहोगे
दर्जन भर
फिर तुम्हें
कौन सी सजा देनी चाहिए?
हम पूछ भी किसे रहे है!
तय तो हमे करना है
लगता है तुम्हे
लिंग छाँटकर...
साँडनी बना कर
अंदरुनी गलियों में
छुपछुपके भटकने वाले...
संग के लिए अपनी जैसी
औलाद ढुँढने वाले
गे के हवाले
कर देना चाहिए
वह भी उनकी मर्जी जैसै
दुर्व्यवहार करने की कानुनी
अनुमती दे कर
बस यह प्रार्थना है
न्या देवता के पास
किसी चंगुल में आकर
न्याय देवता के सपूत
जामीन पर ना छोडे
या अपिल का...
या दयामृत्यु का
अवसर भी दे
या मानवाधिकार का
उल्लंघन समझने वाले
अंधभक्तों को
मौका न दे
कभी भी...
कभी भी
तभी हमारे मन को
शांती मिलेगी
और उस बहना की
आत्मा को श्रद्धांजली!
*©रमेश*