Tuesday, 31 December 2024

new year

सरले किती, उरले किती
आता हिशेब मांडू नका
झाल्या चुका विसरून जा
आपापसांत भांडू नका
सैर मनाला आवर घाला
मर्यादा ओलांडू नका
परतत नाही गेली वेळ
येणारी पण सांडू नका
हवेत इमले बांधून कोणी
सुखी आजवर झाला नाही
वास्तवतेचे ठेवा भान
उशीर अजुनी झाला नाही
कर्तव्याच्या वज्रमुठीला
ठेवा बांधून उघडू नका
पाश्च्यात्यांच्या अनुकरणाने
उगाच आपण बिघडू नका
उसणी कलमे जोडून निर्जीव
लटकी फसवी होतील गावे
संस्कृती आपली महान आहे
तिला जपू या आदरभावे
नववर्षाच्या संकल्पांची
उगाच आपली गर्दी नको
पोकळ आशा घोर निराशा
अपूर्णतेला वर्दी नको
समृद्धीचा येउनी मोहोर
सदा फुलावे आपले जीवन
जाळून अथवा गाडून टाका
दुष्टविचारी आतील रावण
हीच सदीच्छा हेच मागणे
सकाळ आपली व्हावी हसरी
सौख्य राहावे रोज निरंतर
याहून नाही मनीषा दुसरी
               रमेश कुरलीकर


Thursday, 12 December 2024

बाल साहित्य का प्रवास हिंदी

बालसाहित्य की यात्रा और भाषा

      बालसाहित्य बच्चों के लिए लिखा गया साहित्य है। मराठी बालसाहित्यकी जडे मराठी लोकसाहित्य में पाई गई है, लेकिन इस साहित्य का काल कौनसा है यह बताना मुश्किल है। मराठी साहित्य मराठी लोकसाहित्य का हिस्सा है। बुढी दादी द्वारा सुनाई गई मनोरंजक कहानियाँ, जो संस्कृत से प्राकृत आदि भाषाओ में आई कहानियाँ, महान व्यक्तियों की रोचक कहानियाँ साहित्य को लोकप्रिय बनाती रही, लेकिन लोक साहित्य के अलिखित प्रकृती के कारण मराठी लोकसाहित्य उपलब्ध नही हो सका।
        महानुभाव संप्रदायके लीळाचरित्र जैसे आद्यग्रंथ में बालसाहित्य के कुछ प्रतीक चिहन मिलते है। इसकी कथाएँ दृष्टांत के रूप मे साकार हुई है। इसमें से *महत्वपूर्ण* दृष्टांत लोककथा के स्वरूप में दिखाई देते है। धानाई नाम की एक छोटी बच्ची को उन्होने कुछ कहानियाँ बताई थी जो आज उपलब्ध लोकसाहित्य की सबसे प्राचीन रूप की बालकथा कही जा सकती है।
"साळेचे घर मेणाचे: काऊळेयाचे घर सेणाचे: पावसाळी काऊळेयाचे घर पुढे जाये: साळेचें वाचे: मग उगीची राहिली "
चक्रधर स्वामीजीने ~सौ वर्ष पूर्व~ *बारहवीं सदी में* धानाई को सुनाई हुई कहानियॉ और वर्तमान में छोटे बच्चों को सुनाई जाने वाली चिडिया और कौए की कहानी एक ही है।
  यद्यपि पंचतंत्र पाँचवी शताब्दी में लिखा गया एक संस्कृत ग्रंथ है लेकिन इसका अनुवाद 13 वी और 14 वी शताब्दी में मध्यकालीन मराठी वाङमय की *शुरुआत* है। विष्णू शर्मा द्वारा लिखित पंचतंत्र बच्चो से लेकर बडों तक सभी का उद्बोधन करने वाला नीती ग्रंथ ही है। कल्पित कथाओंके माध्यम द्वारा नीती शिक्षा देने का प्रयास पंचतंत्र ने किया है।
    उस समय की शिक्षा प्रणाली में पंचतंत्र, हितोपदेश, इसापनीती आदि ग्रंथों का अंतर्भाव होता था। छोटे छोटे बच्चों से सबसे पहले अमरकोश, शब्दरुपावली मुखोदगत करवायी जाती  थी, बाद में इन्ही ग्रंथो का वाचन करवाया जाता था। बच्चों को अक्सर रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य की कथाएँ सुनाई जाती थी, साथ ही साथ रघुवंश, कुमारसंभव आदी महाकाव्यो जैसे भारतीय संस्कृती के उच्च आदर्श दर्शाने वाली कहानियाँ भी बच्चो को सुनाई जाने लगी। महाकाव्य काल के बाद निर्माण हुई पुराणकथाएँ तो बच्चों के लिए कहानीयों का खजाना ही थी। मंदिर की कथा से उन देवतां की महत्ता का गान करने वाली कथाऐ, पौराणिक कवियों के मुखसे होते हुए जनगंगा तक पहुँची। घर में दादा दादी से लेकर बच्चों तक से यह सुंदर एवं श्राव्यरूप में सुनाई देने लगी।
       लोककथाओं जैसेही लोकगीतों में बच्चों की मनोवृत्ती आकृष्ट करने वाली मनमोहक कविताऐं मिलती है। इससे अंगाई, फुगडी, भोंडला, उखाणा ओवी आदि का जन्म हुआ। बच्चों के गीतों की मुख्य विशेषताएँ इस तरह से पाई जा सकती है और बच्चों के गीत के मुख्य विशेषताएँ है गीतकारिता। सरल भाषा में मजेदार विचार प्रस्तुत करके बच्चों का मनोरंजन इन *गीतों* ने किया है। संसार की अमूल्य निधी होनेवाले बलिराजा के प्रति सजीव प्रेम से लिखे गए यह बाल गीत बच्चों के साथ एकाकारप्रतीत होते है। अलग अलग उत्सवों पर गाए जाने वाले लडकियों के गीत उन्हे आनंद देते है।

*नौंवी सदी* का बालसाहित्य
    यह एहसास बहुत देर से हुआ की मराठी भाषा में बच्चों के लिए साहित्य होना चाहिए। मुद्रण कलाके निर्माण के बाद अंग्रेजी भाषा के अनुकरण से ही बालसाहित्यकी निर्मिती होने लगी। 1806 में तंजावर में सरफोजीराजेने इसापनीती का मराठी में अनुवाद किया और बालबोध मुक्तावली नामक पुस्तक प्रकाशित की। यह मराठी में छपाई की गई पहिली किताब थी। इसके बाद श्रीरामपूर मिशन प्रेस मे डॉ.कॅरी ने वैजनाथ पंडितजी से सिंहासन बत्तीसी, हितोपदेश, पंचतंत्र आदि पुस्तकों का मराठी में अनुवाद करवाया। पंचतंत्र से आई हुई पुस्तकें पंचोपाख्यान और विदुरनीती मराठी में भी प्रकाशित हुई, लेकिन उनका केवल पाठ्यक्रम की पुस्तकों के लिए ही महत्त्व था।
     उस समय बच्चों को नीती पाठ देना यह महत्वपूर्ण उद्देश सामने रखते हुए पुस्तकें लिखी जाती थी। लिपीधारा, अंकलीपी, बोधवचन, पंचोपाख्यान, विदुरनीती आदि पाँच पुस्तकें इसी उद्देश से छपी। इसी समय ही मराठी बालसाहित्य में एक नई पुस्तक जुडी थी वह तीन से आठ वर्ष के बच्चो के लिए लिखी गई पुस्तक बालगोष्टी है। सरल, सुगम एवं बोधगम्य भाषा होने से हैदशाळा पुस्तक मंडलीने इस पुस्तक को तुरंत अपना लिया। इस संस्था के सचिव श्री व्यंकोबा नाईक ने इसापनीती की पुस्तकों का अनुवाद किया और उनकी मृत्यू के बाद यह  कार्य सदाशिव काशिनाथ छत्रे द्वारा पुरा किया गया। बालमित्र और विष्णुशास्त्री बापट लिखित नीती दर्पण सीखने के लिए एक छोटी लेकिन ज्ञानवर्धक पुस्तक है। स. का. छत्रे एक श्रेष्ठ लेखक थे। उन्होंने 1828 में वेताळपंचविशी, बालमित्र, इसापनीती इन तीन ग्रंथों का सरल और आसान अंग्रेजी मे अनुवाद किया। उन्होने 1838 में बोधकथा नामक पुस्तक लिखी।1831 में बालशास्त्री जांभेकर ने बच्चों को शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए नीतीकथा पुस्तक लिखी। मेजर कँडी के सुझाव पर 1858 में बोधकथा और नीती बोधकथा नामक पुस्तक प्रकाशित की गई। विष्णुशास्त्री बापटने 1838 में कुल दस कथाओं से पूर्ण नीती दर्पण की रचना की। अतः 1838 में बालोपदेश लिखा गया। शिक्षा मंडल तथा सरकारी शिक्षा विभाग की ओर से हरी केशवजी पठारे ने 1846 में शालोपयोगी नीतिग्रंथ नामक पुस्तक लिखी। 25वीं सदी के दौरान 1825 से 1850 तक मराठी बच्चों के साहित्य में अनुवादित रूप में लिखी गई कीताबें शामिल थी और विशेष रूप से बच्चों के लिए थी।
        वर्ष 1850 में मराठी लेखन के सभी दोष दूर हो गए और बालसाहित्य की स्थिती अच्छी हो गई। शिक्षा बोर्ड ने बच्चों के साहित्य के विकास मे योगदान दिया। 1854-55 में वी.को.ओक जी ने इस विचार की पुष्टी की। 1861-1895 तक शिक्षा विभाग में सहाय्यक शिक्षा निरीक्षक रहे ओक जी ने पाठ्यक्रम की पुस्तकों के सहित बालसाहित्य की लगभग पचास पुस्तकें प्रकाशित की। इसलिए उनको मराठी बाल वांग्मय के जनक कहते थे। इसी काल में हरिकृष्ण दामले ने भी बहुत योगदान दिया। सैंडफोर्ड और मर्टन लिखित हरि और त्र्यंबक का अनुवाद सरल और सुंदर है, जिसे बच्चे समझ सकते हैं और पसंद कर सकते है। इस  काल की सर्वोत्तम पुस्तक अरबी भाषा में सुरसकथाएँ यह है।
इस अनुवादित पुस्तक के कुछ पहले अंश कृष्णशास्त्री चिपळूणकर द्वारा लिखे गए थे। अगले कुछ एपिसोड विष्णुशास्त्री द्वारा लिखे गए थे और आखिर के कुछ हिस्से हरी केशव दामले द्वारा लिखे गए और पुरे *किए* गए थे।
       बच्चों के लिए कविताएँ भी होती है और वो बच्चों को समझती भी है, उन्हें रिझाती भी है यह सत्य अँग्रेजी कविता के अभ्यास से अपने लोगों की समझ में आ गया। इस तरह की पहली कविता महादेव शास्त्री कोल्हटकर ने लिखी थी। उसके बाद *वी. को. ओक,* ह.कृ.दामले, मो.ग. लोढे ने लिखी थी। इसके अलावा बच्चों के दृष्टिकोन की रचना बालगीतों में करने की कोशिश करने वाले कवि दत्त, टिळक, भा.रा.तांबे माधव ज्युलियन, बालकवि, वा.गो.मायदेव ने किया।
    बालनाट्य निर्मितीकी शुरूआत 19 वीं सदी मे शुरू हुई। कहानी और कविता की तुलना में साहित्य की यह विधा उपेक्षित नजर आती है। बच्चों के लिए नाटक लिखना 1828 में शुरू हुआ। बालमित्र पत्रिका में बच्चों के लिए स.का.छत्रे  द्वारा लिखा गया संवाद प्रसिद्ध है- "राजा को देखकर मुझे क्या मिलेगा?" भागीरथी उनके द्वारा लिखित नाटक है। 1829 में किरात ने "पन्हाळगडचा शिलेदार" यह बच्चों के लिए ऐतिहासिक नाटक लिखा।
20 वीं सदी का बाल साहित्य
     20 वीं सदी में बालबुद्धी को पसंद आने वाले बालगीतों को जन्म दिया गया। जिनमें लक्ष्मीबाई तिलक, कवी दत्त, भा.रा.तांबे, माधव ज्युलियन शामिल थे। इसके अलावा काशीताई कानिटकर, ह. स. गोखले, केशवसुत, म.का. कारखानिस, कवी यशवंत, ना.ग. लिमये, वा.गो.मायदेव, भ. श्री. पंडित, वा.ना. विगम, गोपीनाथ तळवळकर, ग.ह.पाटील, साने गुरुजी, के. नारखेडे, व्ही. एम. कुलकर्णी, शांता शेळके, संजीवनी मराठे, लीलावती भागवत, सुमती पायगावकर, अपर्णा देशपांडे, तारा देशपांडे, निर्मला देशपांडे, इंदुमती भावे, सरिता पदकी, नलिनी तळपदे, सरला देवधर, शिरीष पै, वृंदा लिमये, माधुरी पारसनीस, सदानंद रेगे, ग. दि. माडगूळकर, विंदा करंदीकर, राजा मंगळवेढेकर *तथा* आरती प्रभू, मंगेश पाडगावकर जी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।  
      मराठी आदमी एक तो राजनीति का दिवाना होता है और दुसरा नाटक का। बालनाट्य, नाट्यछटा, एकांकिका, नाटुकले आदि बच्चों के लिए लिखे गए नाटकों की शैलीयाँ है। 1948  के बाद सई परांजपे, रत्नाकर मतकरी, विजय तेंडुलकर जी का नाटक लेखन समृद्धता से ओतप्रोत दिखाई देता है।
  20 सदी में बाल उपन्यास यह विधा साहित्यिक क्षेत्र में तेजी में थी। जिसमें साने गुरुजी, गंगाधर गाडगीळ, अमरेंद्र गाडगीळ, महादेव शास्त्री जोशी, यदुनाथ थत्ते, मालतीबाई दांडेकर, वामनराव चोरघडे, भालचंद्र रानडे, ना.गो. शुक्ल, गो. नी. दांडेकर, ग. दि. माडगूळकर, भा. रा.भागवत, सुमती पायगावकर, शैलजा राजे, राजा मंगळवेढेकर, शामला शिराळेकर, दि.बा. मोकाशी, दिवाकर बापट, सुधाकर प्रभू, अशोक देशपांडे जी ने बच्चों की दुनिया पर ध्यान केंद्रित करते हुए मनोरंजक और ज्ञानवर्धक कहाँँनिया लिखी है।
      21वीं सदी में बालसाहित्य का भ्रमण वायुगती से शुरू हो गया। इसमें एकनाथ आव्हाड, संगीता बर्वे, राजीव तांबे, गोविंद गोडबोले, डॉ. श्रीकांत पाटील, कैलास दौंड, सुरेश सावंत, बबन शिंदे, चंद्रकांत निकाडे, परशराम आंबी, नसीम जमादार, शिवाजी चाळक, संजय ऐलवाड जी ने विभिन्न प्रकार के साहित्य के साथ बच्चों का मनोरंजन और ज्ञानवर्धन किया है। बालचरित्र, एकांकिका, नाट्यछटा आदि साहित्यप्रकारो में लेखन हो रहा है और यह एक आशा जनक और आश्वासक बात है।
       बालसाहित्य की भाषा बालसाहित्य की भाषा बच्चों के लिए आनंददायक होनी चाहिए। शुरुआती दिनों में बालसाहित्य की भाषा में आसानी से समझी जाने वाली भाषा पर जोर दिया जाता था। बीसवीं सदी में बालकविता, कथा, उपन्यास और नाटकोनें भाषा का सरल आकलन हो ऐसा प्रयत्न किया है। इसमें मुख्य रूप से बालकविताओंका गायन होता दिखाई देता है। वहीं बालकथा और उपन्यासों के संवाद, नाटक के पात्रों की मुँहबोली भाषा की तरह लिखे गए है जिसमें बच्चों को दिलचस्पी हो। कहानी को रोचक बनाते हुए इस बात का भी ख्याल रखा गया है की भाषा में कोई गडबडी न हो।
     आज 21 वीं सदी के बालसाहित्य की भाषा सरल, सुलभ और बच्चो को जल्द से जल्द अवगत हो ऐसी लिखी गई है। बालकविता में भी नयापन, कथा, उपन्यासों की नाविन्यता, नाटक के नए नए विषय लिखते समय साहित्यको नें भी  यह विषय बच्चों के लिए है इसका ज्ञान और समझ प्रस्तुत करते हुए सरल, सुविधाजनक भाषा में साहित्य लिखा है।

Wednesday, 13 November 2024

तुकोबाचे अभंग : तुझें आहे तुजपासीं । परि तूं जागा चुकलासी।


माझें दैवत हें रंगीं । नाचे वैष्णवांच्या संगीं ।

               

भरलें मग अंगीं । निवाड करी दोहींचा ॥ध्रु.॥


साच माझा देव्हारा । भाक ठेवा भाव खरा ।   

           

त्रिगुणाचा फुलवरा । आणा विनंति सांगतों ॥१॥


तुझें आहे तुजपासीं । परि तूं जागा चुकलासी।    

 

निवडुनियां नासी । तुझ्या घरिच्यांनीं केली ॥२॥


आतां न पडे ठावें । वांचूनियां माझ्या देवें ।    

            

अंधकार व्हावें । नासु ठाव शोधावा ॥३॥


आंधळ्यासी डोळे । देते पांगुळासी पाय ।       

          

वांजा पुत्र होय । नवस पुरविते विठाई ॥४॥


उगविलीं कोडीं । मागें कित्येकाचीं बापुडीं ।     

          

तुका म्हणे घडी । न लगे नवस द्या आधीं ॥५॥

Thursday, 29 August 2024

उचित श्रद्धांजली

. *उचित श्रद्धांजली*

उस बहना के 
सातों अंगों में
छेडखानी करके
उसे नरक यातना 
देने वाले नरपशू...
पशू भी ऐसा 
दर्दनाक व्यवहार करते है
ऐसा मैंने सुना नही
यह उनको भी 
गाली लगेगी

तो क्या कहू तुम्हें?
शैतान... नरकंकाल... 
या दानव...
नहीं यह भी विशेषण
तुम्हारे लिए
उचित नहीं होंगे
हमें नया विशेषण
ढुँढना होगा...

तुम ऐसी 
भटकती आत्माऐं हो
जो अपनी जन्मदात्री पर
ऐसे ही अत्याचार
करनेवालों के
प्रतिशोध में संसार में
घुमनेवाली

लेकिन यह प्रतिशोध
नही था
यह था केवल... 
और केवल अत्याचार
जैसा किसीने
सोचा भी नही होगा
तुम्हारी वासनाओंका
शिकार बना दिया
तुमने उस असहाय
देवता को
तुम्हारे मन में
रत्तीभर भी इन्सानियत
होती तो...
तो शायद ऐसा दुष्कर्म
नही होता

जिसका दूध पीकर
तुम पले-पोसे थे
उक माताके उपकारोंको
भूलकर हैवान
बन गए तुम

अब बात सजा की है
तो...

तुम्हे फाँसी की सजा 
दी जाए
तो कुछ घंटोमें
या क्षणों में
छुटकारा पाओगे
यह हमें मंजूर नहीं

आजन्म कारावास 
दिया जाए तो
लाख बहानें बनाकर
तुम्हे छुडवाने के लिए
सैंकडों काले कौए
धन की लालच 
दौडते आयेंगे

नहीं तो किसी
लालची नेता की 
मेहरबानी से 
या अस्तीन में रहनेवाले
कर्मी को चीट-चिरगुट दे कर
कारा में भी
ऐश मनाओंगे

उस वक्त तुम्हे
न याद आयी धर्मपत्नी
न बाल बच्चे
न भाई-बहना
न माता पिता
न और कोई
ऐसी कौनसी नशा के
हवी हो गए थे तुम?

तुम्हे ऐसा ही 
छोड दिया जाए
तो तुम अपने जैसी
संतान पैदा करते रहोगे
दर्जन भर

फिर तुम्हें
कौन सी सजा देनी चाहिए?

हम पूछ भी किसे रहे है!
तय तो हमे करना है

लगता है तुम्हे
लिंग छाँटकर...
साँडनी बना कर 
अंदरुनी गलियों में
छुपछुपके भटकने वाले...
संग के लिए अपनी जैसी 
औलाद ढुँढने वाले
गे के हवाले
कर देना चाहिए
वह भी उनकी मर्जी जैसै
दुर्व्यवहार करने की कानुनी
अनुमती दे कर

बस यह प्रार्थना है
न्या देवता के पास
किसी चंगुल में आकर
न्याय देवता के सपूत
जामीन पर ना छोडे
या अपिल का...
या दयामृत्यु का 
अवसर भी दे

या मानवाधिकार का
उल्लंघन समझने वाले
अंधभक्तों को 
मौका न दे
कभी भी...
कभी भी 

तभी हमारे मन को 
शांती मिलेगी
और उस बहना की 
आत्मा को श्रद्धांजली!
      *©रमेश*

Friday, 5 July 2024

काय द्यावं

आपलं वाचन झाल्यानंतर
वाचणाऱ्याला पुस्तक द्यावं
अधिक समजून घेण्यासाठी
अभ्यासाला मस्तक द्यावं

वारंवार चुकणार्‍याला 
थोडं सौम्य शासन द्यावं
गरजू आणि ऐकणाऱ्याला 
थोडंथोडकं भाषण द्यावं

नको असेल पटकन जर
तर सोडून व्यसन द्यावं
पोट थोडं रितं ठेवून 
भुकेल्याला राशन द्यावं

विद्यार्थ्याला ज्ञान द्यावं
याचकाला दान द्यावं
आपल्याकडं फाटक ठेवून
दुसऱ्याला छान द्यावं
            *© रमेश*

Sunday, 30 June 2024

भ्रृणहत्येचे पाप

     भ्रृणहत्येचे पाप
आले पाऊस
छत्र्या भिजल्या
वीज कडाडून गेली
गणपत नामे
त्या वाण्याची
इच्छा मरून गेली.
चावून काड्या
गणपा वाणी
घरभर फेकत बसतो
कुणी विचारा
काही त्याला
केवळ नुसता हसतो
गाडी गेली
माडी गेली
तरीही रुबाब दावी
हाकलून देतो
दारामधूनच
सलूनमधला न्हावी
गणी न मिळता
हर वाण्याची
अशीच असते कहाणी
पूर दाटतो
त्याच्या नयनी
वाहून जाते नहाणी
आता कोणी
त्याला पुसतो
उगाच त्याचा पत्ता
पट हरलेला
राजा तोही
रोज गाठतो गुत्ता
अशा कितीशा
भर वाण्यांची
पडली गणती नाही
पुसून अश्रू
आणि डोळे 
झाली कळकट बाही
बापजादे
करून गेले
भ्रृणहत्येचे पाप
भाव खाऊनी
गेले समदे
आणि वधूचे बाप
         ©रमेश

Thursday, 20 June 2024

करिअरच्या संधी

करिअरच्या संधी
 
1. स्वतःला ओळखा व करिअर निवडा 
https://bit.ly/3pmXOob
 2. कला शाखेतील करिअरच्या संधी 
https://bit.ly/3cRARDo 
3. वाणिज्य शाखेतील करिअरच्या संधी 
https://bit.ly/3p8Hw25
4. तंत्र शिक्षणातील करिअरच्या संधी
https://bit.ly/3cTaEVd
5. कृषी क्षेत्रातील करिअरच्या संधी 
https://bit.ly/3I0JN7R
6. वैद्यकीय क्षेत्रातील करिअरच्या संधी 
https://bit.ly/3DYYeXO
7. खेळातील करिअरच्या संधी 
https://bit.ly/3cQSXp5
8. ललित कला शाखेतील करिअरच्या संधी 
https://bit.ly/3nYGzKl
9. संशोधन क्षेत्रातील करिअरच्या संधी १
https://bit.ly/3HXwc1m
10. संशोधन क्षेत्रातील करिअरच्या संधी २
https://rb.gy/mcbjve 
11. स्पर्धापरीक्षा क्षेत्रातील करिअरच्या संधी 
https://rb.gy/lfzd7x 
12. पर्यटन क्षेत्रातील करिअरच्या संधी
https://rb.gy/llgvib 
13. संरक्षण क्षेत्रातील करिअरच्या संधी 
https://rb.gy/ud3

Tuesday, 18 June 2024

Health Science, वाणिज्य शाखेतील संधी, संरक्षण क्षेत्रातील संधी

*Health Science*
*Life science क्षेत्रातील संधी*

Health science मध्ये आरोग्य सेवांशी निगडीत सर्वच विभागांचा समावेश होतो.
M.B.B.S 
B.H.M.S
B.A.M.S 
यासारख्या सर्वांना माहित असलेल्या कोर्सेस शाखा आहेतच शिवाय त्याचबरोबर 
B.D.S
नर्सिंग 
फार्मसी 
पैरामेडिकल 
बायोमेडिकल 
हेल्थ care 
अशा प्रकारच्या करिअरच्या संधी सुद्धा या क्षेत्रात उपलब्ध आहेत, त्याशिवाय 
फिजिकल ट्रेनर 
न्युरिशनिस्ट 
अश्या वेगळ्या वाटेने जाणारी करिअर सुद्धा या क्षेत्रात करता येऊ शकतात.
10वी नंतर हेल्थ केअरमध्ये रोजगार आणि स्वयंरोजगाराकडे जाणारे अनेक प्रमाणपत्र अभ्यासक्रम उपलब्ध आहेत, उच्च माध्यमिक व्यवसाय अभ्यासक्रम, ITI, डिप्लोमा चे पर्याय सुद्धा आहेत.
मेडिकलला जाण्यासाठी विज्ञान शाखेत प्रवेश घेऊन 11वी, 12वी करणं आवश्यक आहे, physics, chemistry, maths, biology, बरोबर गणित हा पूरक विषय घेतल्यास त्याचा अधिक उपयोग होतो.
12वी नंतर मेडिकल ची NEET ही प्रवेश परीक्षा देऊन 
MBBS 
डेंटिस्ट
नर्सिंग 
पैरामेडिकल 
फिजोयोथेरपी 
ऑक्युपेशनल थेरपी,
स्पीच आणि audio थेरपी, प्रोस्थेटिक्स आणि आर्थोडोन्टिक्स 
आणि अल्टरनेट मेडिसिन 
होमिओपॅथी 
आयुर्वेद 
युनानी 
आणि व्हेटर्नरी सायन्स अश्या स्वरूपाच्या कोर्सेसला प्रवेश मिळतो 
AFMC=NEET 
मेडिकलशी संबंधित जेव्हा प्रॉपेशनल कोर्सेस आहेत, त्यांची कालमर्यादा 4वर्षे 6महिने, आणि 1वर्षाचा अनुभव अशा स्वरूपाचा असतो, हे कोर्सेस पूर्ण केल्यावर post graduate कोर्सेस करण्यासाठी NEET सारखीच आणखी एक प्रवेश परीक्षा देऊन करता येतात. पुढील तीन वर्षात post graduateion होऊ शकता याशिवाय अल्टरनेट मेडिसिन, योग, नॅचरोपॅथी
संशोधनाच्या संधी उपलब्ध आहेत त्यासाठी आयुष मंत्रालयाची स्थापना करण्यात आली आहे.
फार्मसीचा पर्याय सर्वांना माहिती आहेच, 12वी नंतर डिप्लोमा फार्मसी, बॅचलर in फार्मसी, डी.फार्मा, केल्यास स्वतःचा व्यवसाय देखील करता येतो, किंवा फार्मसी कंपनीत नोकरी सुद्धा करता येते. वैद्यकिय क्षेत्रातील आवश्यक गोष्टी, आवश्यक क्षमता, 
सेवावृत्ती 
मानसिक आणि भावनिक स्थेर्य,
सातत्यपूर्ण अभ्यास,
कठोर परीश्रम करण्याची तयारी 
इंग्रजी भाषेवर प्रभूत्व 
आणि संयम असणं गरजेचं आहे 
त्यामुळे आपली आवड, क्षमता आणि त्या क्षेत्रात असलेल्या असंख्य संधी यांचं एकत्रित मिश्रण केल्यास उत्तम करिअर बनवता येत
*वाणिज्य शाखेतील संधी*
वाणिज्य शाखा म्हणजे व्यापार, किंवा व्यापाराशी निगडीत क्षेत्र, व्यापार हा दैनंदिन जीवनाचा अविभाज्य भाग आहे, आणि त्यांच्याशी संबंधित असंख्य गोष्टी आपल्याला कॉमर्स मध्ये शिकता येतात कॉमर्स म्हंटल की फक्त 
C. A, C.S, ICWA, MBA असं जे क्षेत्र आपल्या डोळ्यासमोर येत त्यापेक्षा कितीतरी अधिक वेगळ्या संधी कॉमर्स मध्ये उपलब्ध आहेत. दैनंदिन जीवनात व्यापारात असलेल्या जवळपास प्रत्येक गोष्टीचा काही ना काही तरी संबंध वाणिज्य शाखेत येतो,  
निरनिराळे कर 
बँकिंग 
अकॉउंटीग 
परचेस 
सेल्स 
मार्केटिंग 
इन्शुरन्स तसेच 
स्टोअर्स 
बिझनेस डेव्हलपमेंट 
कॉस्टिंग 
वित्त 
औडीट 
यांचा योग्य अर्थ लावून करिअर करणं या सगळ्यांचा संबंध प्रामुख्याने कॉमर्स मध्ये येतो 
10वी नंतर निरनिराळे प्रमाणपत्र अभ्यासक्रम आहेत 
ट्रॅव्हल्स अँड टूरीझम 
हॉस्पिटलिटी 
रिटेल मॅनेजमेंट इत्यादी 
याशिवाय उच्च माध्यमिक व्यावसायिक अभ्यासक्रम पूर्ण करून 12वी करता येते यानंतर रोजगार आणि स्वयं रोजगार यांच्या अनेक संधी उपलब्ध आहेत, तसेच अनुभव घेत दुरुस्थ शिक्षणाचे पर्याय उपलब्ध आहेत. 10वी नंतर वाणिज्य शाखेत थेट प्रवेश शक्य आहे, कॉमर्स शिकताना प्रामुख्याने तीन विषय आपल्याला सखोल शिकावे लागतात 
इंग्रजी, अकॉउंटनसी, अर्थशास्त्र अर्थात या सर्व विषयांचा गणिताशी जोड आहे परंतु स्वरूप निराळ आहे.
B.com होईपर्यंत अर्थशास्त्र, अकॉउंटनसी हे विषय आपण शिकतो. भविष्यात C.A, किंवा C.S साठी 11वी पासून अभ्यास सुरु करता येतो. या अभ्यासक्रमाच्या प्रवेश आणि अन्य प्राथमिक परीक्षा, B.com सुरु असताना देता येतात.
वाणिज्य पदवी संपादन करताना अभ्यासाबरोबरच बाहेर प्रत्यक्ष काम करत सराव केला आणि पुढे आवश्यक असणारी सॉफ्टवेअरचे ज्ञान सुद्धा या काळात शिकले तर विद्यार्थ्यांची नोकरी लागण्याची पात्रता अधिक वाढते.
B.com नंतर TAX मध्ये असलेलं D.T. L/ G.D.C.A असे हमखास रोजगार देणारे पर्याय तर उपलब्ध आहेतच तसेच वाणिज्य पदवी नंतर कायद्याची पदवी घेतल्यास, बँकिंग क्षेत्रात मुबलक संधी उपलब्ध आहेत शिवाय इतर अनेक पदवी अभ्यासक्रमात उपलब्ध असलेला MBA चा मार्ग उपलब्ध असतो.
पण त्यासाठी 11वी, 12वी ला गणित असल्यास उपयोग अधिक होतो
*संरक्षण क्षेत्रातील संधी* 
*Uniformed services
*गणवेशधारी सेवा या क्षेत्रातील संधी*

चला तर मग uniformed service चा परिचय करून घेऊया....
आणि जाणून घेऊया......करिअरच्या संधी 
आपल्या देशाच्या सीमांवर पहारा देणाऱ्या प्रसंगी आपल्या प्राणपणाने युद्धात लढणाऱ्या सैन्यातल्या जवानांपासून ते अगदी सेक्यूरीटी गार्ड पर्यंत, सर्व सेवांचा या क्षेत्रात समावेश होतो, हे क्षेत्र केवळ एक सामान्य नोकरी नसून यासाठी लागणार 
विलक्षण शौर्य 
समर्पण भावना 
आणि निष्ठेमुळे या सेवेला वलंय प्राप्त झालं आहे, या सर्विसचे चार प्रकारात वर्गीकरण करता येत 
पहिला प्रकार -आर्मड फोर्सेस-
1भूदल 
2 नौदल 
3 हवाईदल 

दुसरा प्रकार- पैरामिलिटरी फोर्सेस 
1.इंडियन फोस्ट गार्ड्स 
2.आसाम रायफल्स 
3.स्पेशल फ्रेटियर फोर्स 

तिसरा क्रमांक -केंद्रीय व राज्य पोलीस दल 
1.केंद्रीय राखीव पोलीस दल C.R.P.F 
2.सीमा सुरक्षा बल 
इंडो तिबेटीयन सीमा पोलीस 
Center Industrial-
सेक्यूरीटि फोर्स -C.I.S.F
सशस्त्र सीमा बल 
रेल्वे सुरक्षा दल 
N.D.R.F नॅशनल राष्ट्रीय आपत्ती निवारण बल/दल 
राज्य राखीव दल 
N.S.G 
S.P.G 
यांचा प्रामुख्याने अंतर्भाव होतो 

चौथा प्रकार=सिव्हिल डीफेन्स organisation 
1.होमगार्ड 
2. अग्नीशमन दल
वयाच्या आणि शिक्षणाच्या विविध टप्प्यावर या चारही गणवेशधारी सेवांमध्ये जाता येते....
10वी, किंवा 12वी उत्तीर्ण झालं की 
*17वर्षे, 6महिने, ते 21वर्ष*
Fitnes test 
मेडिकल test 
लेखी परीक्षा देऊन गणवेशधारी सेवेत जाता येते....
त्यासाठी 
शारीरिक तंदुरुस्ती 
भरपूर दमसास आवश्यक असतो....
अशी व्यक्ती आर्मड फोर्सेस मध्ये जवान किंवा कॉन्स्टेबल मध्ये भरती होऊ शकते....
यासाठी ठराविक कालावधी मध्ये भरतीच्या जाहिरातींवर लक्ष ठेवणे आवश्यक असते, आणि भरतीसाठी आवश्यक तयारी करणे गरजेचं असत 
सैन्यात भरती होण्यासाठी म्हणजेच आर्मी, नेव्ही, एअरफोर्स मध्ये भरती होण्यासाठी 
12वी नंतर NDA 
नॅशनल डिफेन्स अकॅडमी अर्थात N.D.A ची परीक्षा असते ही परीक्षा 
U.P.S.C द्वारे घेतली जाते....

आर्मी साठी कोणत्याही शाखेतून 12वी होणं गरजेचं असत...
तर नेव्ही/air force साठी 12वी गणित विज्ञान, भौतिकशास्त्र, आवश्यक, अर्थात 12वी science नंतर ही परीक्षा देता येते.....
या परीक्षेत उत्तीर्ण झाल्यानंतर S.S.B मुलाखत आणि मेडिकल test आवश्यक असते.....
त्याचबरोबर 
पदवीनंतर अनेक मार्गानी सैन्यात जाता येत...
त्यासाठी कोणत्याही शाखेच्या पदवीनंतर किंवा इंजिनिअरिंगच्या ही संधी उपलब्ध आहेत....
पदवी करत असताना 
N.C.C केल्यास लेखी परीक्षेतुन सूट मिळते...
पदवी नंतर 
AFCAT परीक्षा....
CDS परीक्षा.....
I.M.A=इंडियन मिलटरी अकॅडमी
I.N.A=इंडियन नेव्ही अकॅडमी 
एअर फोर्स अकॅडमी मध्ये जाता येत...
तसेच ऑफिसर ट्रेनिंग अकॅडमी 
शॉर्ट सर्विस कमिशन सुद्धा करता येत....
आर्मड फोर्सेस मध्ये लागणाऱ्या मेडिकल सर्विसेस मध्ये 12वी नंतर मेडिकल कोर्सेस करून 
पैथालॉजी लबोरेटरी 
रेडिओलॉजी 
हॉटेल मॅनेजमेंट 
नर्सिंग 
असे विविध technical कोर्स करून JCO- ज्युनिअर कमिशन ऑफिसर म्हणून सहभागी होता येत....
पोलीस बनण्यासाठी सामान्यत पोलीस भरती असते. त्यामधून जावं लागत. मात्र अधिकारी बनन्यासाठी पदवीनंतर महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग, केंद्रीय लोकसेवा आयोग, UPSC च्या परीक्षा देऊन पोलीस दलात जाता येत
पोलीस =पोलीस भरती......
अधिकारी=महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग, केंद्रीय लोकसेवा आयोग........
UPSC मधून CBI, RO, IB या सेवांमध्ये निवड होऊ शकते, वाहतूक पोलिसांची प्रक्रिया देखील समान असते. अर्थात एकदा पोलीस दलात प्रवेश मिळाला, की पोलीस खात्या अंतर्गत अनेक करिअरच्या संधी उपलब्ध आहेत 
*खाजगी संरक्षण सेवा*
युनिफॉर्म सर्विस पेक्षा वेगळं क्षेत्र स्थानिक स्तरावरील security एजन्सी......
खाजगी security एजन्सी स्थानिक स्तरावर खाजगी security एजन्सी असतात. त्यातूनही यामध्ये जाता येत. युनिफॉर्म सर्विससाठी लागणाऱ्या बाबी 
शारीरिक पात्रता कारण या क्षेत्रात शारीरिक क्षमतांचा कस लागतो. शिवाय 
मानसिक सहनशक्ती लागते 
आसपासच्या घटनांचा अभ्यास, चौकस बुद्धी,
 दैनंदिन घडामोंडीचे आकलन 
हे सुद्धा यशस्वी करिअर होण्याच्या दृष्टीने महत्वाच असत त्यामुळे आपली आवड क्षमता आणि त्या क्षेत्रात असलेल्या असंख्य संधी यांची सांगड घालून आपल्याला आपल्या स्वप्नातील करिअर बनविता येत, निवडता येत.....

करिअर म्हणजे नेमक काय? आपल्या स्वप्नातील करिअर जाणून घ्यायच असेल तर महाराष्ट्र शासन आणि SAF म्हणजे श्यामची आई फाऊंडेशन यांच्या संयुक्त विद्यमाने तयार करण्यात आलेल्या www.mahacareermitra.in या वेबसाईटला भेट देऊन आपल्या जिल्हातील कॉलेजस, अभ्यासक्रम माहिती करून घ्या. तसेच योग्य करिअरसाठी मॅजिक फ्रेम वर्क व्हिडीओ नक्कीच पहा