Sunday, 12 November 2023

ताई-दादांना पाखरांची विनंती

इवलासा जीव आमचा
नका रे फटाके फोडू
दादा-ताई विनंती 
शपथ नका मोडू
    घरट्यात येतो फटाका   
    हिरव्या हिरव्या पानात
    इजाबिजा झाली तर
    नाही डॉक्टर रानात
जंगलास लागतो वणवा
चुकीमुळे तुमच्या छोट्या
अंडीही जातात जळून 
खाक होतील कोठ्या
    चिऊ-काऊ, खारोटी
    मुंग्या, बेडूक, ससे
    सरपटणारे जीवतरी
    सांगा वाचतील कसे?
धुरामुळे कासावीस
आमची पिलं होतात
आवाजाची वाटते भीती
सगळे गांगरून जातात
   कागदांचा कचरा होतो
   तुमच्याच की रे दारात
   सफाईचं जादा काम
   आपल्याच आईला घरात
 थांबेल ना रे झाडांची 
 बागेमधली सळसळ
 पटलं तर बघा बाबा
 येऊन आमची कळकळ

                

Friday, 10 November 2023

फराळाचं झाड

.    *खरं सुख*

बाबा यंदा दिवाळीत
फराळाचं आणा झाड
नको खेळणी, नको कपडे
नको फटाके फाऽड फाऽड

ज्यांच्या घरी नसेल होत
दिवाळीचा सण
थोडा थोडा राखून ठेवीन 
त्यांच्यासाठीपण

मी खाईन, त्यातलं थोडं
त्यांना देईन नक्की
तुम्हास आपल्या लेकीची
खातरी आहे ना पक्की

वंचितांना द्यावं थोडं
राखून आपली भूक
वाटून खाणं कपडे लेणं
यात खरंय सुख
      
             *अनुतनय*

Thursday, 9 November 2023

ही आठवण माझ्यासह काही जणांची

शिक्षेच्या भीतीपेक्षा 
लाजेचं भय जास्त होतं
प्रार्थना चुकल्यावर
शिक्षा होते हे माहीत असूनही
मुद्दामच रोज उशिरा जायचो
'लेट कमर्स' ओळीत
सर्वांत शेवटी उभा राहायचो
त्यामुळं
चड्डीच्या ठिगळाला 
पडलेल्या भोकातून
कुणालाच 
चिमटा घेता येत नव्हता
           
अंडरपँट म्हणजे काय?
सतराव्या वर्षी कळालं
सातवीपर्यंत गादीपाटाच्या 
पट्ट्यापट्ट्याच्या कापडाचीच
नाडीची चड्डी वापरली
हायस्कूल गेल्यावर
युनिफॉर्म कंपल्सरी
पांढरा सदरा दाजीकडून
तो थोडा ढगळ होता
हातोपे कापून
घड्याळ घालायचो
शिवाची जुनी खाकी पँट
महिन्याभरात बोच्यावर विरघळत गेली
आईनं दुसर्‍या एका पँटच्या
पुढच्या बाजूचे तुकडे जोडून
डागडुजी केली 
हायस्कूलात जाऊ लागलो
प्रार्थना चुकल्यावर
शिक्षा होते हे माहीत असूनही
मुद्दामच रोज उशिरा जायचो
शिक्षेच्या भीतीपेक्षा 
लाजेचं भय जास्त होतं
'लेट कमर्स' ओळीत
सर्वांत शेवटी उभा राहायचो
त्यामुळं
चड्डीच्या ठिगळाला 
पडलेल्या भोकातून
कुणालाच 
चिमटा घेता येत नव्हता

           . *लेट कमर्स*

अंडरपँट म्हणजे काय?
सतराव्या वर्षी कळालं
सातवीपर्यंत गादीपाटाच्या 
पट्ट्यापट्ट्याच्या कापडाचीच
नाडीची चड्डी वापरली

हायस्कूलमध्ये गेल्यावर
युनिफॉर्म कंपल्सरी
पांढरा सदरा मिळवला दाजीकडून 
तो थोडा ढगळ होता
हातोपे कापून
घड्याळ घालायचो

शिवाकडून घेतलेली 
जुनी खाकी पँट
महिन्याभरात बोच्यावर विरघळत गेली
आईनं दुसर्‍या एका पँटच्या
पुढच्या बाजूचे तुकडे जोडून
डागडुजी केली 
हायस्कुलात जाऊ लागलो

प्रार्थना चुकल्यावर
शिक्षा होते हे माहीत असूनही
मुद्दामच रोज उशिरा जायचो
शिक्षेच्या भीतीपेक्षा 
लाजेचं भय जास्त होतं

'लेट कमर्स' ओळीत
सर्वांत शेवटी उभा राहायचो
त्यामुळं
चड्डीच्या ठिगळाला 
पडलेल्या भोकातून
कुणालाच 
चिमटा घेता येत नव्हता

. *लेट कमर्स*

ही आठवण माझ्यासह काहीजणांची... 
अंडरपँट म्हणजे काय?
सतराव्या वर्षी कळालं
सातवीपर्यंत गादीपाटाच्या 
पट्ट्यापट्ट्याच्या कापडाचीच
नाडीची चड्डी वापरली

हायस्कूलमध्ये गेल्यावर
युनिफॉर्म कंपल्सरी
पांढरा सदरा मिळवला दाजीकडून 
तो थोडा ढगळ होता
हातोपे कापून
घड्या घालायचो

शिवाकडून घेतलेली 
जुनी खाकी पँट
महिन्याभरात ढुंगणावर विरघळत गेली
आईनं दुसर्‍या एका पँटच्या
पुढच्या बाजूचे तुकडे जोडून
डागडुजी केली 
हायस्कुलात जाऊ लागलो

प्रार्थना चुकल्यावर
शिक्षा होते हे माहीत असूनही
मुद्दामच रोज उशिरा जायचो
शिक्षेच्या भीतीपेक्षा 
लाजेचं भय जास्त होतं

'लेट कमर्स' ओळीत
सर्वांत शेवटी उभा राहायचो
त्यामुळं
चड्डीच्या ठिगळाला 
पडलेल्या खिडकीतून
कुणालाच 
चिमटा घेता येत नव्हता

           *रमेश कुरलीकर*

Tuesday, 7 November 2023

चुकतो तो... ... ... (कविता)

    चुकतो तो... ... ...

चुकतो त्याचे माणूस नाव
हृदय मसलतो चुकरा घाव
आपले आपेश, आपल्या चुका
पुन्हा वाटाडे होतात राव

    शिक्षा आणि चूक यांचा
    संबंध किती योग्य असतो 
    व्यस्त की अव्यस्त असेल
    याचा थांगपत्ता नसतो

चुकतात जे ते कधीकधी
आपल्या वाटा हरवून बसतात
आता मुळीच माघार नाही
असंही कुणी ठरवून असतात

    चुकल्याशिवाय शिकण्याची
    संधी पुन्हा मिळत नाही
    असंही कुणी म्हटलं तरी
    चुकारास तेही कळत नाही

चुकायलाही मज्जाव नाही
पण एक लक्षात ठेवा 
अचूक जर भेटले तर
करू नका त्याचा हेवा 

                   रमेश कुरलीकर

Monday, 25 September 2023

वृत्ते

१] तडित : गालगा
[२] वीरलक्ष्मी : गालगा गालगा गालगा
[३]स्त्रग्विणी : गालगा गालगा गालगा गालगा
[४] कल्पना : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
[५]भामिनी : गालगा गालगा गालगागा
[६]लज्जिता : गालगा गालगा लगागागा
[७]पुष्प : गालगागा
[८]मनोरमा : गालगागा गालगागा
[९] कादंबरी : गालगागा गालगा
[१०] मेनका : गालगागा गालगागा गालगा
[११]मंजुघोषा : गालगागा गालगागा गालगागा
[१२]राधा : गालगागा गालगागा गालगागागा
[१३]देवप्रिया/कालगंगा : गालगागा गालगागा गालगागा गालगा
[१४]व्योमगंगा : गालगागा गालगागा गालगागा गालगागा
[१५] सती : लगालगागा
[१६] जलौघवेगा : लगालगागा लगालगागा
[१७]हिरण्यकेशी : लगालगागा लगालगागा लगालगागा लगालगागा
[१८] तोटक : ललगा ललगा ललगा ललगा
[१९] संयुत : गागालगा गागालगा
[२०] आनंद : गागालगा लगागा
[२१] आनंदकंद : गागालगा लगागा गागालगा लगागा
[२२] विद्युल्लता : गागालगा लगागा गागालगा लगा
[२३] रसना : गागालगा लगालगा गागालगा लगा
[२४] मंदाकिनी : गागालगा गागालगा गागालगा गागालगा
[२५] सौदामिनी : लगागा लगागा लगागा लगा
[२६] भुजंगप्रयात : लगागा लगागा लगागा लगागा
[२७] वागेश्वरी : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगा
[२८] प्रमिला/मृगाक्षी : लगागागा लगागागा लगागा
[२९] वियदगंगा : लगागागा लगागागा लगागागा लगागागा
[३०] कलिंदनंदिनी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[३१] चंचला : गालगाल गालगाल गालगाल गालगाल
[३२] चामर : गालगाल गालगाल गालगाल गालगा
[३३] रंगराग : गालगा लगागागा गालगा लगागागा
[३४] गांधर्वी : गागागागा गागागा
[३५] विद्युन्माला /पादाकुलक : गागागागा गागागागा
[३६] कल्याण : गागागागा गागागागा गागागागा
[३७] विधाता : गागागागा गागागा गागागागा गागागा
[३८] आकाश : गागागागा गागागागा गागागागा गागागा
[३९] ब्रह्मरूपक /कामोन्नता : गागागागा गागागागा गागागागा गागागाग
[४०] मोहिनी : मात्रा [१४,१० ]
[४१] कामिनी : गालगाल गालगालगा
[४२] साशंक : गागाल लगागागा गागाल लगागागा
[४३] महामाया : लगागागा लगागागा
[४४] प्रसूनांगी : लगागागा लगागागा लगागागा
[४५] पिनाकी : लगागागा लगागागा लगागागा लगागा
[४६] हिमांशुमुखी : लगाललगा लगाललगा लगाललगा लगाललगा
[४७] मेधावी : गागागाल गागागाल गागागा
[४८] मायावी : गागागाल गागागाल गागागाल गागागा
[४९] रागिणी : गालगालल गालगालल गालगा
[५०] वंशस्थ : लगालगागा ललगा लगालगा
[५१] अनुराग : ललगालगालगागा ललगालगालगागा
[५२] कन्दर्प : गागालगाल गालल गागालगाल गागा
[५३] रम्याकृती : गागालल गागालल गागा
[५४] मदिराक्षी : ललगागा ललगागा ललगा
[५५] वनमाला : ललगागा लगालगा ललगा
[५६] मानवती : गाललगा गाललगा गाललगा
[५७] प्रेय : गाललगा गालगा गाललगा गालगा
[५८] शुभकामी : गागालल गागालल गागालल गागा
[५९] कलावती : लगालगा ललगागा लगालगा गागा
[६०] मरीचिका : लगालगा ललगागा लगालगा ललगा
[६१] प्रियशिष्या : ललगागा ललगागा ललगागा ललगा
[६२] यशोगंध : लगागाल लगागाल लगागाल लगागा
[६३] श्यामकान्त : गालगाल लगागाल गालगाल लगागा
[६४] नूपुर : गाललगा गालगाल गाललगा गालगा
[६५]रसोदत्त : लगागाल गालगाल  लगागाल गालगाल
[६६] उषा : लगागाल गागागा लगागाल गालगा
[६७] मनमोहिनी : लगागाल गागागा लगागाल गागागा
[६८] गिरिबाला : ललगागा ललगागा ललगागा ललगागा ललगागा
[६९] वसुन्धरा : लगालगा ललगागा लगालगा लगालगा ललगागा
[७०] इन्दुमुखी : गाललगा गाललगा गाललगा गाललगा
[७१] प्रमाथिनी : लगालगा गाललगा लगालगा गाललगा
[७२] पाणिबन्ध : गालगाल गाललगा गालगाल गाललगा
[७३] मानसभंजनी : गाललगा लगालगा गाललगा लगालगा
[७४] आंदोलिका : गागालगागा लगालगागा
[७५] केकिरव : ललगालगागा ललगालगागा
[७६] उपेंद्रवज्रा : लगालगागा ललगालगागा
[७७] विमला : ललगा लगागा
[७८] इंद्रवंशा : गागाल गागाल लगा लगा लगा
[७९] शालिनी : गागागागा गालगागालगागा
[८०] वैश्वदेवी : गागागागागा गालगागा लगागा
[८१] चित्रा : गागागा गागागा गागागा लगागा लगागा
[८२] शिखंडिनी : लगागागागागा
[८३] भ्रमरी : ललगागा
[८४] कन्या : गागागागा
[८५] वागुरा : गालगालगा
[८६] लालिनी : गालगाल लगा लगा लगा
[८७] नाराच : गागालगा लगालगा
[८८] भुजंगसंगता : ललगा लगा लगा लगा
[८९] अच्युत : गालगा ललगा लगा
[९०] पंक्तिका : गालगा लगागा लगालगा
[९१] विद्युलेखा : गागागागा गागा
[९२] सरल : गागागागा ललगा
[९३] तार : ललगा ललगा गागागा
[९४] रामा : गागालगा लगागागागा
[९५] कलिका : गालगागा गागाल लगागा
[९६] कलह : ललगागा ललगागा गा
[९७] सुलोचना : गागाललगा लगालगा
[९८] चारूलोचना : ललगा ललगा लगालगा
[९९] नृपात्मजा : लगालगागा लगालगा
[१००] अर्धक्षामा : गागागागा गाललगागा
[१०१] दोधक : गालल गालल गालल गागा
[१०२] मोदक : गालल गालल गालल गालल
[१०३] त्रिलोकगामी : गागागागा लगालगागा
[१०४] वैष्णव : गाललगागा लगालगागा
[१०५] इरा : गागाललगा लगालगागा
[१०६] अमला : ललगा ललगा लगालगागा
[१०७] मयूरसारिणी : गालगालगा लगालगागा
[१०८] दीपकमाला : गाललगागा गालगालगा
[१०९] चारूलक्षणा : लगालगागा गालगालगा
[११०] रूपोन्मता : गागागागा गागागागा गा
[१११] पद्मावर्त : गागागागा गागागागा गागा
[११२] कान्तोत्पीडा : गाललगागा गाललगागा गागा
[११३] माल्यश्री : गागागागा गागागागा गागागा
[११४] व्रीडा : लगागागा
[११५] सुकेशी : लगागागा लगागा
[११६] सावित्री : गागागालगा
[११७] सुनंदा : गागागा लगागा
[११८] सोमप्रिया : गागालगा
[११९] मदनप्रिया : ललगालगा
[१२०] चूडामणि : गागालगा ललगा
[१२१] वैखरी : गागालगा गागालगा गागालगा
[१२२] मानसहंस : ललगालगा ललगालगा ललगालगा
[१२३] सुरनिम्नगा : ललगालगा ललगालगा ललगालगा ललगालगा
[१२४] प्रीति : गालगागागा
[१२५] नीलतोया : गालगागा गागा
[१२६] नगाणिका : लगालगा
[१२७] प्रमाणिका : लगालगा लगालगा
[१२८] विभावरी : लगालगा लगालगा लगालगा  
[१२९] प्रभाव : लगालगा लगालगा लगालगा  लगा
[१३०] मृणालिनी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१३१] तरंगिणी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१३२] अनंगशेखर : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१३३] घारि : गालगाल
[१३४] जला : गागालगा लगा
[१३५] सुकामिनी : गालगाल गालगा
[१३६] समानिका : गालगाल गालगाल
[१३७] कामिनी : गालगाल गालगालगा
[१३८] कलापति : गालगाल गालगाल गालगाल गा
[१३९] देवराज : गालगाल गालगाल गालगाल गालगा
[१४०] गंडका : गालगाल गालगाल गालगाल गालगाल गालगाल
[१४१] प्रमद्वरा : गागालगा लगा गागालगा लगा
[१४२] नारि : गागागा
[१४३] सम्मोहा : गागागागागा
[१४४] तनुमध्या : गागाल लगागा
[१४५] हाला : गागाल लगागागा
[१४६] उध्द्ता : गालगाल लगागा
[१४७] मातंगी : गागागा गागागा
[१४८] साशंक : गागाल लगागागा गागाल लगागागा
[१४९] कलावती : लगालगा ललगागा लगालगा गागा
[१५०] श्रीलीला : गागागा गागागा गागागा गागागा
[१५१] मनोमोहिनी " लगागाल गागागा लगागाल गागागा
[१५२] केशा : लगागा
[१५३] सोमराजी : लगागा लगागा
[१५४] सौदामिनी : लगागा लगागा लगागा लगा
[१५५] कंद : लगागा लगागा लगागा ल
[१५६] कंदुक : लगागा लगागा लगागा गा
[१५७] सिंहपुच्छ : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१५८] क्रीडचंद्र : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१५९] विद्युदाला : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१६०] वागीश्वरी : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगा
[१६१] महानाग : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१६२] हारीत : गागालगागा
[१६३] मंथान : गागाल गागाल
[१६४] संनीत : गागाल गागाल गागाल
[१६५] तारामती : गागाल गागाल गागाल गा
[१६६] लयग्राहि : गागाल गागाल गागाल गागा
[१६७] सारंग : गागाल गागाल गागाल गागाल
[१६८] मंदारमाला : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गा
[१६९] सर्वगामी : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागा
[१७०] आभार : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल
[१७१] कामबाण दंडक : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागा
[१७२] द्वियोद्ध : गालगा गालगा
[१७३] हंसमाला : गालगा गालगा गा
[१७४] श्रुतानंद : गालगा गालगा गागा
[१७५] दया : गालगा गालगा गा गालगा गालगा गा
[१७६] श्राद्धरांता : गालगा गालगा गालगा गालगा गा
[१७७] केकेनी : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गा
[१७८] स्वैरिणीक्रीडन : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
[१७९] मत्तमातंग दंडक : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
[१८०] आख्यानकी : गागालगागा ललगालगागा लगालगागा ललगालगागा
[१८१] भ्रांत : गालगागा गालगागा गालगागा गालगा गालगागा गालगा
[१८२] वारकामिनी : गालगाल गालगाल गालगा
[१८३] वानरी : लगालगा लगालगा गालगा
[१८४] शिखी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१८५] शिखंडी : लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१८६] नितंबिनी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१८७] सारसी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१८८] वारुणी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१८९] अपरा : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१९०] वतंसिनी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१९१] सुहंसिक : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१९२] प्रदीस : गालगाल गालगा लगालगा लगालगा
[१९३] यवन्विता : गालगाल गालगाल गालगाल लगालगा लगालगा लगालगा गा
[१९४] धरित्री : लगालगा लगालगा लगालगा गा
*[१९५] स्वानंदसम्राट: गागालगागा गागालगागा 
[१९६]देवराज: गालगाल गालगाल गालगाल गालगा
[१९७] सत्ईश: गालगागा गालगागा गालगागा गागा
*

*****************************************************************

: काही निवडक मात्रा वृत्ते :

१. समजाती :

अ] पद्मावर्तनी :
[१] वररमणी : ४२ मात्रा [८+८+८+८+८+२]
[२] तुंदिल : ३८ मात्रा [८+८+८+८+६]
[३] कपिवीर : ३६ मात्रा [८+८+८+८+४]
[४] वनहरिणी : ३२ मात्रा [८+८+८+८]
[५] हरिभगिनी / स्वरगंगा : ३० मात्रा [८+८+८+६]
[६] प्रियलोचना : २९ मात्रा [८+८+८+५]
[७] लवंगलता : २८ मात्रा [८+८+८+४]
[८] सूर्यकांत / समुदितमदना : २७ मात्रा [८+८+८+३]
[९] चंद्रकांत / पतितपावन : २६ मात्रा [८+८+८+२]
[१०] अनलज्वाला : २४ मात्रा [८+८+८]
[११] शुभगंगा : २२ मात्रा [८+८+६]
[१२] वर्षा : २१ मात्रा [८+८+५]
[१३] वंशमणि : २० मात्रा [८+८+४]
[१४] पादाकुलक : १६ मात्रा [८+८]
[१५] मुरजयी : १५ मात्रा [८+७]
[१६] बालानंद : १४ मात्रा [८+६]
[१७]शुद्धसती : १२ मात्रा [८+४]
[१८] पिशंग : १० मात्रा [८+२]

ब] भृंगावर्तनी :
[१९] सुखराशि : २८ मात्रा [६+६+६+६+४]
[२०] दासी : २४ मात्रा [६+६+६+६]
[२१] मदनरंग : २३ मात्रा [६+६+६+५]
[२२] परिलीना : २२ मात्रा [६+६+६+४]
[२३] धवलचंद्रिका : २० मात्रा [६+६+६+२]
[२४] जीवनलहरी : १२ मात्रा [६+६]

क] हरावर्तनी :
[२५] किंकिणी : २० मात्रा [गागाल गागाल गागाल गागाल]
[२६] अविनाशी : १९ मात्रा [गागाल गागाल गागाल गागा]
[२७] दंतरूचि : ३४ मात्रा [गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गागा]
[२८] वरमंगला : २० मात्रा [गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा]
[२९] सुरमंदिर : १० मात्रा [गालगा गालगा]
[३०] वीणावती : १८ मात्रा [गालगा गालगा गालगा लगा]

२. अर्धसमजाती

अ] पद्मावर्तनी :
[३१] कुसुमवल्ली : ५६ मात्रा  [वंशमणि + कपीवीर]
[३२] मन्मथसुंदर : ६२ मात्रा [हरिभगिनी + वनहरिणी]
[३३] सदामंडिता : ४६ मात्रा [पादाकुलक+हरिभगिनी]
[३४] रत्नमाला : ५४ मात्रा [चंद्रकांत + लवंगलता]
[३५] रक्षा : ४० मात्रा [लवंगलता + शुध्दसती]
[३६] गगनचपला : ४० मात्रा [ शुध्दसती + लवंगलता]
[३७] रणरंग : ४३ मात्रा [पादाकुलक + समुदितमदना]
[३८] सत्किर्ती : ३८ मात्रा [समुदितमदना +८+३]
[३९] नंदनंदन : ३८ मात्रा [८+३+समुदितमदना]
[४०] मूढा : ३६ मात्रा [पिशंग + चंद्रकांत]
[४१] श्रीमती : ४० मात्रा [पादाकुलक+अननज्वाला]
[४२] मुक्ताफलमाला : २२ मात्रा [शुध्दसती + पिशंग]

ब] भृंगावर्तनी :
[४३] महालोल : ४६ मात्रा [६+६+६+४+६+६+६+६]
[४४] प्रफुल्ल : ३४ मात्रा [६+६+६+५+६+५]
[४५] ह्रदयमोहना : २८ मात्रा [६+२+६+६+६+२]

क] हरावर्तनी :
[४६] मोहमाया : ३७ मात्रा [गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गा]१] तडित : गालगा
[२] वीरलक्ष्मी : गालगा गालगा गालगा
[३]स्त्रग्विणी : गालगा गालगा गालगा गालगा
[४] कल्पना : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
[५]भामिनी : गालगा गालगा गालगागा
[६]लज्जिता : गालगा गालगा लगागागा
[७]पुष्प : गालगागा
[८]मनोरमा : गालगागा गालगागा
[९] कादंबरी : गालगागा गालगा
[१०] मेनका : गालगागा गालगागा गालगा
[११]मंजुघोषा : गालगागा गालगागा गालगागा
[१२]राधा : गालगागा गालगागा गालगागागा
[१३]देवप्रिया/कालगंगा : गालगागा गालगागा गालगागा गालगा
[१४]व्योमगंगा : गालगागा गालगागा गालगागा गालगागा
[१५] सती : लगालगागा
[१६] जलौघवेगा : लगालगागा लगालगागा
[१७]हिरण्यकेशी : लगालगागा लगालगागा लगालगागा लगालगागा
[१८] तोटक : ललगा ललगा ललगा ललगा
[१९] संयुत : गागालगा गागालगा
[२०] आनंद : गागालगा लगागा
[२१] आनंदकंद : गागालगा लगागा गागालगा लगागा
[२२] विद्युल्लता : गागालगा लगागा गागालगा लगा
[२३] रसना : गागालगा लगालगा गागालगा लगा
[२४] मंदाकिनी : गागालगा गागालगा गागालगा गागालगा
[२५] सौदामिनी : लगागा लगागा लगागा लगा
[२६] भुजंगप्रयात : लगागा लगागा लगागा लगागा
[२७] वागेश्वरी : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगा
[२८] प्रमिला/मृगाक्षी : लगागागा लगागागा लगागा
[२९] वियदगंगा : लगागागा लगागागा लगागागा लगागागा
[३०] कलिंदनंदिनी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[३१] चंचला : गालगाल गालगाल गालगाल गालगाल
[३२] चामर : गालगाल गालगाल गालगाल गालगा
[३३] रंगराग : गालगा लगागागा गालगा लगागागा
[३४] गांधर्वी : गागागागा गागागा
[३५] विद्युन्माला /पादाकुलक : गागागागा गागागागा
[३६] कल्याण : गागागागा गागागागा गागागागा
[३७] विधाता : गागागागा गागागा गागागागा गागागा
[३८] आकाश : गागागागा गागागागा गागागागा गागागा
[३९] ब्रह्मरूपक /कामोन्नता : गागागागा गागागागा गागागागा गागागाग
[४०] मोहिनी : मात्रा [१४,१० ]
[४१] कामिनी : गालगाल गालगालगा
[४२] साशंक : गागाल लगागागा गागाल लगागागा
[४३] महामाया : लगागागा लगागागा
[४४] प्रसूनांगी : लगागागा लगागागा लगागागा
[४५] पिनाकी : लगागागा लगागागा लगागागा लगागा
[४६] हिमांशुमुखी : लगाललगा लगाललगा लगाललगा लगाललगा
[४७] मेधावी : गागागाल गागागाल गागागा
[४८] मायावी : गागागाल गागागाल गागागाल गागागा
[४९] रागिणी : गालगालल गालगालल गालगा
[५०] वंशस्थ : लगालगागा ललगा लगालगा
[५१] अनुराग : ललगालगालगागा ललगालगालगागा
[५२] कन्दर्प : गागालगाल गालल गागालगाल गागा
[५३] रम्याकृती : गागालल गागालल गागा
[५४] मदिराक्षी : ललगागा ललगागा ललगा
[५५] वनमाला : ललगागा लगालगा ललगा
[५६] मानवती : गाललगा गाललगा गाललगा
[५७] प्रेय : गाललगा गालगा गाललगा गालगा
[५८] शुभकामी : गागालल गागालल गागालल गागा
[५९] कलावती : लगालगा ललगागा लगालगा गागा
[६०] मरीचिका : लगालगा ललगागा लगालगा ललगा
[६१] प्रियशिष्या : ललगागा ललगागा ललगागा ललगा
[६२] यशोगंध : लगागाल लगागाल लगागाल लगागा
[६३] श्यामकान्त : गालगाल लगागाल गालगाल लगागा
[६४] नूपुर : गाललगा गालगाल गाललगा गालगा
[६५]रसोदत्त : लगागाल गालगाल  लगागाल गालगाल
[६६] उषा : लगागाल गागागा लगागाल गालगा
[६७] मनमोहिनी : लगागाल गागागा लगागाल गागागा
[६८] गिरिबाला : ललगागा ललगागा ललगागा ललगागा ललगागा
[६९] वसुन्धरा : लगालगा ललगागा लगालगा लगालगा ललगागा
[७०] इन्दुमुखी : गाललगा गाललगा गाललगा गाललगा
[७१] प्रमाथिनी : लगालगा गाललगा लगालगा गाललगा
[७२] पाणिबन्ध : गालगाल गाललगा गालगाल गाललगा
[७३] मानसभंजनी : गाललगा लगालगा गाललगा लगालगा
[७४] आंदोलिका : गागालगागा लगालगागा
[७५] केकिरव : ललगालगागा ललगालगागा
[७६] उपेंद्रवज्रा : लगालगागा ललगालगागा
[७७] विमला : ललगा लगागा
[७८] इंद्रवंशा : गागाल गागाल लगा लगा लगा
[७९] शालिनी : गागागागा गालगागालगागा
[८०] वैश्वदेवी : गागागागागा गालगागा लगागा
[८१] चित्रा : गागागा गागागा गागागा लगागा लगागा
[८२] शिखंडिनी : लगागागागागा
[८३] भ्रमरी : ललगागा
[८४] कन्या : गागागागा
[८५] वागुरा : गालगालगा
[८६] लालिनी : गालगाल लगा लगा लगा
[८७] नाराच : गागालगा लगालगा
[८८] भुजंगसंगता : ललगा लगा लगा लगा
[८९] अच्युत : गालगा ललगा लगा
[९०] पंक्तिका : गालगा लगागा लगालगा
[९१] विद्युलेखा : गागागागा गागा
[९२] सरल : गागागागा ललगा
[९३] तार : ललगा ललगा गागागा
[९४] रामा : गागालगा लगागागागा
[९५] कलिका : गालगागा गागाल लगागा
[९६] कलह : ललगागा ललगागा गा
[९७] सुलोचना : गागाललगा लगालगा
[९८] चारूलोचना : ललगा ललगा लगालगा
[९९] नृपात्मजा : लगालगागा लगालगा
[१००] अर्धक्षामा : गागागागा गाललगागा
[१०१] दोधक : गालल गालल गालल गागा
[१०२] मोदक : गालल गालल गालल गालल
[१०३] त्रिलोकगामी : गागागागा लगालगागा
[१०४] वैष्णव : गाललगागा लगालगागा
[१०५] इरा : गागाललगा लगालगागा
[१०६] अमला : ललगा ललगा लगालगागा
[१०७] मयूरसारिणी : गालगालगा लगालगागा
[१०८] दीपकमाला : गाललगागा गालगालगा
[१०९] चारूलक्षणा : लगालगागा गालगालगा
[११०] रूपोन्मता : गागागागा गागागागा गा
[१११] पद्मावर्त : गागागागा गागागागा गागा
[११२] कान्तोत्पीडा : गाललगागा गाललगागा गागा
[११३] माल्यश्री : गागागागा गागागागा गागागा
[११४] व्रीडा : लगागागा
[११५] सुकेशी : लगागागा लगागा
[११६] सावित्री : गागागालगा
[११७] सुनंदा : गागागा लगागा
[११८] सोमप्रिया : गागालगा
[११९] मदनप्रिया : ललगालगा
[१२०] चूडामणि : गागालगा ललगा
[१२१] वैखरी : गागालगा गागालगा गागालगा
[१२२] मानसहंस : ललगालगा ललगालगा ललगालगा
[१२३] सुरनिम्नगा : ललगालगा ललगालगा ललगालगा ललगालगा
[१२४] प्रीति : गालगागागा
[१२५] नीलतोया : गालगागा गागा
[१२६] नगाणिका : लगालगा
[१२७] प्रमाणिका : लगालगा लगालगा
[१२८] विभावरी : लगालगा लगालगा लगालगा  
[१२९] प्रभाव : लगालगा लगालगा लगालगा  लगा
[१३०] मृणालिनी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१३१] तरंगिणी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१३२] अनंगशेखर : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१३३] घारि : गालगाल
[१३४] जला : गागालगा लगा
[१३५] सुकामिनी : गालगाल गालगा
[१३६] समानिका : गालगाल गालगाल
[१३७] कामिनी : गालगाल गालगालगा
[१३८] कलापति : गालगाल गालगाल गालगाल गा
[१३९] देवराज : गालगाल गालगाल गालगाल गालगा
[१४०] गंडका : गालगाल गालगाल गालगाल गालगाल गालगाल
[१४१] प्रमद्वरा : गागालगा लगा गागालगा लगा
[१४२] नारि : गागागा
[१४३] सम्मोहा : गागागागागा
[१४४] तनुमध्या : गागाल लगागा
[१४५] हाला : गागाल लगागागा
[१४६] उध्द्ता : गालगाल लगागा
[१४७] मातंगी : गागागा गागागा
[१४८] साशंक : गागाल लगागागा गागाल लगागागा
[१४९] कलावती : लगालगा ललगागा लगालगा गागा
[१५०] श्रीलीला : गागागा गागागा गागागा गागागा
[१५१] मनोमोहिनी " लगागाल गागागा लगागाल गागागा
[१५२] केशा : लगागा
[१५३] सोमराजी : लगागा लगागा
[१५४] सौदामिनी : लगागा लगागा लगागा लगा
[१५५] कंद : लगागा लगागा लगागा ल
[१५६] कंदुक : लगागा लगागा लगागा गा
[१५७] सिंहपुच्छ : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१५८] क्रीडचंद्र : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१५९] विद्युदाला : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१६०] वागीश्वरी : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगा
[१६१] महानाग : लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा लगागा
[१६२] हारीत : गागालगागा
[१६३] मंथान : गागाल गागाल
[१६४] संनीत : गागाल गागाल गागाल
[१६५] तारामती : गागाल गागाल गागाल गा
[१६६] लयग्राहि : गागाल गागाल गागाल गागा
[१६७] सारंग : गागाल गागाल गागाल गागाल
[१६८] मंदारमाला : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गा
[१६९] सर्वगामी : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागा
[१७०] आभार : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल
[१७१] कामबाण दंडक : गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागाल गागा
[१७२] द्वियोद्ध : गालगा गालगा
[१७३] हंसमाला : गालगा गालगा गा
[१७४] श्रुतानंद : गालगा गालगा गागा
[१७५] दया : गालगा गालगा गा गालगा गालगा गा
[१७६] श्राद्धरांता : गालगा गालगा गालगा गालगा गा
[१७७] केकेनी : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गा
[१७८] स्वैरिणीक्रीडन : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
[१७९] मत्तमातंग दंडक : गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
[१८०] आख्यानकी : गागालगागा ललगालगागा लगालगागा ललगालगागा
[१८१] भ्रांत : गालगागा गालगागा गालगागा गालगा गालगागा गालगा
[१८२] वारकामिनी : गालगाल गालगाल गालगा
[१८३] वानरी : लगालगा लगालगा गालगा
[१८४] शिखी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१८५] शिखंडी : लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१८६] नितंबिनी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१८७] सारसी : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१८८] वारुणी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१८९] अपरा : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१९०] वतंसिनी : गालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा
[१९१] सुहंसिक : लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा लगालगा गालगा
[१९२] प्रदीस : गालगाल गालगा लगालगा लगालगा
[१९३] यवन्विता : गालगाल गालगाल गालगाल लगालगा लगालगा लगालगा गा
[१९४] धरित्री : लगालगा लगालगा लगालगा गा
*[१९५] स्वानंदसम्राट: गागालगागा गागालगागा 
[१९६]देवराज: गालगाल गालगाल गालगाल गालगा
[१९७] सत्ईश: गालगागा गालगागा गालगागा गागा
*

*****************************************************************

: काही निवडक मात्रा वृत्ते :

१. समजाती :

अ] पद्मावर्तनी :
[१] वररमणी : ४२ मात्रा [८+८+८+८+८+२]
[२] तुंदिल : ३८ मात्रा [८+८+८+८+६]
[३] कपिवीर : ३६ मात्रा [८+८+८+८+४]
[४] वनहरिणी : ३२ मात्रा [८+८+८+८]
[५] हरिभगिनी / स्वरगंगा : ३० मात्रा [८+८+८+६]
[६] प्रियलोचना : २९ मात्रा [८+८+८+५]
[७] लवंगलता : २८ मात्रा [८+८+८+४]
[८] सूर्यकांत / समुदितमदना : २७ मात्रा [८+८+८+३]
[९] चंद्रकांत / पतितपावन : २६ मात्रा [८+८+८+२]
[१०] अनलज्वाला : २४ मात्रा [८+८+८]
[११] शुभगंगा : २२ मात्रा [८+८+६]
[१२] वर्षा : २१ मात्रा [८+८+५]
[१३] वंशमणि : २० मात्रा [८+८+४]
[१४] पादाकुलक : १६ मात्रा [८+८]
[१५] मुरजयी : १५ मात्रा [८+७]
[१६] बालानंद : १४ मात्रा [८+६]
[१७]शुद्धसती : १२ मात्रा [८+४]
[१८] पिशंग : १० मात्रा [८+२]

ब] भृंगावर्तनी :
[१९] सुखराशि : २८ मात्रा [६+६+६+६+४]
[२०] दासी : २४ मात्रा [६+६+६+६]
[२१] मदनरंग : २३ मात्रा [६+६+६+५]
[२२] परिलीना : २२ मात्रा [६+६+६+४]
[२३] धवलचंद्रिका : २० मात्रा [६+६+६+२]
[२४] जीवनलहरी : १२ मात्रा [६+६]

क] हरावर्तनी :
[२५] किंकिणी : २० मात्रा [गागाल गागाल गागाल गागाल]
[२६] अविनाशी : १९ मात्रा [गागाल गागाल गागाल गागा]
[२७] दंतरूचि : ३४ मात्रा [गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गागा]
[२८] वरमंगला : २० मात्रा [गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा]
[२९] सुरमंदिर : १० मात्रा [गालगा गालगा]
[३०] वीणावती : १८ मात्रा [गालगा गालगा गालगा लगा]

२. अर्धसमजाती

अ] पद्मावर्तनी :
[३१] कुसुमवल्ली : ५६ मात्रा  [वंशमणि + कपीवीर]
[३२] मन्मथसुंदर : ६२ मात्रा [हरिभगिनी + वनहरिणी]
[३३] सदामंडिता : ४६ मात्रा [पादाकुलक+हरिभगिनी]
[३४] रत्नमाला : ५४ मात्रा [चंद्रकांत + लवंगलता]
[३५] रक्षा : ४० मात्रा [लवंगलता + शुध्दसती]
[३६] गगनचपला : ४० मात्रा [ शुध्दसती + लवंगलता]
[३७] रणरंग : ४३ मात्रा [पादाकुलक + समुदितमदना]
[३८] सत्किर्ती : ३८ मात्रा [समुदितमदना +८+३]
[३९] नंदनंदन : ३८ मात्रा [८+३+समुदितमदना]
[४०] मूढा : ३६ मात्रा [पिशंग + चंद्रकांत]
[४१] श्रीमती : ४० मात्रा [पादाकुलक+अननज्वाला]
[४२] मुक्ताफलमाला : २२ मात्रा [शुध्दसती + पिशंग]

ब] भृंगावर्तनी :
[४३] महालोल : ४६ मात्रा [६+६+६+४+६+६+६+६]
[४४] प्रफुल्ल : ३४ मात्रा [६+६+६+५+६+५]
[४५] ह्रदयमोहना : २८ मात्रा [६+२+६+६+६+२]

क] हरावर्तनी :
[४६] मोहमाया : ३७ मात्रा [गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
 गा)

Friday, 22 September 2023

कविता वत्सला

"वच्छे,
राती उशेरपतूर 
तुझ्या जाफ्त्यातनं खुडबुड
ऐकू ईती गं"

"हं.. ... ...."

"उंदीर बिंदीर हुता काय गं
ढाळ झालं तेला 
गतसाली सोप्यातलं
भुईमुगाचं कुडीकं निम्मं आरधं केलं 
शाळू जुंधळ्याचं पोतंबी
एक-दोन जागी कुरतडलंतं
भाताच्या तट्ट्याबिट्याला
लागलाय काय कुणास ठावं
बोका तरी पाळावा एकांदा
पर तेला दूध पाह्यजे.

जरा थिमेट हाय का बघून  
इस्कटनास भवती
पातळ कापडाचं गठुळ करून 

कणकीत मिसळून घालायचं
काळ आवशीद मिळेना झालंय वाटतं
त्या कसल्या तयार वड्या 
आल्यात म्हणं आता
खरं,
म्हाग असत्यात म्हणं

सापळा लावला आस्ता
मातूर त्यात टाकायला
खारकांड कुठणं आणायचं?

पाय चिकटून बसत्याला
कागूद मिळतोय म्हणं हाल्ली
त्यो आणाय बाजार‌ला जायला पाह्यजे 
तेच्यापरास दुकानातल्या
चार गोळ्या आणून टाक

का घूसबीस लागलीया?
चिचुंद्री नसलं न्हव?
आगं काय सांगतोय
आईकतीयास व्हावं?"
"हं"
आमटीला फोडणी टाकता टाकता
डोक्याला गुंडाळलेल्या धडप्याला
एक पीळ देत
वत्सला म्हणाली, "आत्यासाब, 
त्यो घरातला पाळीव उंदीर
आलाता राती... ... "

"सक्काळी सक्काळी
न्हालीस म्हटल्यावर 
संशेय आल्ताच मला
उपास आसंल आसं वाटलं
म्हणून इचारलं गं... ...


रमेश कुरलीकर

Friday, 11 August 2023

नाट्यछटा


*एकाच सादरकर्त्याने अवतीभोवती एक किंवा अनेक व्यक्ती/पात्रे आहेत असे भासवून त्यांच्याशी कल्पिलेल्या एखाद्या विषयावर एकट्यानेच मार्मिकपणे/मिश्कीलपणे केलेला/साधलेला साभिनय वाद/संवाद/सुसंवाद असणारा गद्य लघु वाड़्मय प्रकार म्हणजे नाट्यछटा होय.*

..                              चंद्रकांत निकाडे


Thursday, 3 August 2023

ना.धा.महानोर श्रद्धांजली


.      *बाप गेला*

गेले टिप्पूर चांदणे
सुनासुनासा शिवार
बाभळीच्या काट्यांनाही
आली अश्रूंची किनार

शेत-शिवाराचा बाप
गेला झाला मुका मका
एकमेकांस बघती
धान ज्वारी  टकामका

अशा तेजाची आरती
ढग वारा थेंब गाती
मूक सारा आसमंत
मूक झाली नातीगोती

         *© रमेश*

Wednesday, 26 July 2023

The cloud and rain : Gopal parajuli

Ramu is always delighted to see clouds scattered in the sky. He likes the cloud very much. 'What a great pleasure it would be, if I could cuddle in it,' he thinks.
आकाशात विखुरलेले ढग पाहून रामूला नेहमीच आनंद होतो. 
त्याला ढग खूप आवडतात. 
'त्यात मला मिठी मारता आली तर किती आनंद होईल,' तो विचार करतो.
 But alas! The cloud is very far from the earth. If Ramu had wings like birds, he would have already reached the cloud. But poor Ramu! He can do nothing except watching it.
पण अरेरे! 
ढग पृथ्वीपासून खूप दूर आहे. 
रामूला पक्ष्यांसारखे पंख असते तर तो आधीच ढगापर्यंत पोहोचला असता. 
पण बिचारा रामू! 
तो पाहण्याशिवाय काहीच करू शकत नाही.
One morning, Ramu woke up early and looked here and there with his sleepy eyes. The walls and the ceiling of his room were filled with soft cotton pulps all over. Having thought how his floor had been, he looked down but to his surprise, there was no floor. All he could see down were mountains, rivers, houses and trees. Moreover, the people walking looked like a swarm of ants moving. Ramu was frightened. He started sobbing with fear.
एके दिवशी सकाळी रामूला लवकर जाग आली आणि त्याने झोपलेल्या डोळ्यांनी इकडे तिकडे पाहिले. 
त्याच्या खोलीच्या भिंती आणि छत सर्वत्र मऊ कापसाच्या लगद्याने भरले होते. 
आपला मजला कसा आहे असा विचार करून त्याने खाली पाहिले, पण आश्चर्याची गोष्ट म्हणजे, एकही मजला नव्हता. 
त्याला फक्त डोंगर, नद्या, घरे आणि झाडे दिसत होती. 
शिवाय, चालणारे लोक मुंग्यांच्या थव्याप्रमाणे फिरताना दिसत होते. 
रामू घाबरला. 
तो भीतीने रडू लागला.
In the meantime, a voice was heard, "Ramu, don't be afraid and don't cry. I am a cloud and right now, you are sitting inside me." Hearing the word 'cloud', all his fear vanished. He always thought how a cloud would look like but since he himself was inside it today, he felt very happy.
इतक्यात एक आवाज आला, "रामू, घाबरू नकोस आणि रडू नकोस. मी ढग आहे आणि तू माझ्या आत बसला आहेस." 
'मेघ' हा शब्द ऐकून त्याची सर्व भीती नाहीशी झाली. 
ढग कसा दिसतो हे त्याला नेहमी वाटायचे पण आज तो स्वतः त्याच्या आत असल्यामुळे त्याला खूप आनंद वाटत होता.
"Are you really a cloud?" Ramu asked in a low voice. "Yes. If you don't believe, just touch me," the cloud replied. Ramu touched fearfully. He found the cloud to be as soft and pulpy as he had imagined. 
"तू खरंच ढग आहेस का?" 
रामूने हळू आवाजात विचारले. 
"हो. तुमचा विश्वास नसेल तर मला स्पर्श करा," मेघाने उत्तर दिले. 
रामूने भीतीने स्पर्श केला. 
त्याला ढग त्याच्या कल्पनेइतकेच मऊ आणि पल्पी असल्याचे आढळले. 
"तू खरंच ढग आहेस का?" 
रामूने हळू आवाजात विचारले. 
"हो. तुमचा विश्वास नसेल तर मला स्पर्श करा," मेघाने उत्तर दिले. 
रामूने भीतीने स्पर्श केला. 
त्याला ढग त्याच्या कल्पनेइतकेच मऊ आणि पल्पी असल्याचे आढळले. 
"Cloud, do you live here alone? Don't you have friends?" The feeling of fear inside him had already vanished. He asked fearlessly. "I do have friends but they are very far. That shining sun is my day-time friend and the stars and the moon are my night-time friends. We also play in the sky like you do on the earth." replied the cloud.
"मेघ, तू इथे एकटा राहतोस का? तुला मित्र नाहीत का?" 
त्याच्या आतल्या भीतीची भावना केव्हाच नाहीशी झाली होती. 
त्याने निर्भयपणे विचारले. 
"माझे मित्र आहेत पण ते खूप दूर आहेत. तो चमकणारा सूर्य माझा दिवसाचा मित्र आहे आणि तारे आणि चंद्र हे माझे रात्रीचे मित्र आहेत. पृथ्वीवर तुम्ही जसे खेळता तसे आम्हीही आकाशात खेळतो." 
मेघाने उत्तर दिले.
"What do you play?" Ramu asked surprisingly.
"We also like to play football and cricket like you but due to the gravitational force of the earth, our ball:doesn't stay in the air for long," replied the cloud in a sad tone. "What is this gravitational force?" Ramu again asked. "This gravitational force is a tendency of the earth to attract any object towards itself. Whenever you throw a ball from the earth with whatsoever strength, it doesn't reach here. Instead, it drops back to you. This is because of the earth's gravity." The cloud tried to make Ramu understand nicely.
"Then, what do you play?" Ramu tried to know. "We play hide and seek. Sometimes the sun, sometimes the moon, sometimes the stars and sometimes I become the perpetrator and try finding one another," the cloud told happily.
"तू काय खेळतोस?" 
रामूने आश्चर्याने विचारले.


"आम्हालाही तुमच्यासारखे फुटबॉल आणि क्रिकेट खेळायला आवडते पण पृथ्वीच्या गुरुत्वाकर्षणामुळे आमचा चेंडू: हवेत फार काळ टिकत नाही," मेघाने उदास स्वरात उत्तर दिले. 
"हे गुरुत्वाकर्षण बल काय आहे?" 
रामूने पुन्हा विचारले. 
"ही गुरुत्वाकर्षण शक्ती ही पृथ्वीची कोणत्याही वस्तूला स्वतःकडे आकर्षित करण्याची प्रवृत्ती आहे. जेव्हा तुम्ही पृथ्वीवरून कितीही ताकदीने बॉल फेकता तेव्हा तो इथपर्यंत पोहोचत नाही. उलट तो तुमच्याकडे परत येतो. याचे कारण पृथ्वीचे 
गुरुत्वाकर्षण." 
मेघाने रामूला छान समजावण्याचा प्रयत्न केला.


"मग, तुम्ही काय खेळता?" 
रामूने जाणून घेण्याचा प्रयत्न केला. 
"आम्ही लपाछपी खेळतो. कधी सूर्य, कधी चंद्र, कधी तारे आणि कधी मी गुन्हेगार बनून एकमेकांना शोधण्याचा प्रयत्न करतो," मेघ आनंदाने म्हणाला.
In the meantime, a cold breeze blew in. Both Ramu and the cloud started shivering. "Why are you shivering? Do you feel cold too?" Ramu asked.
"I am equally weak from inside as much as beautiful I look from outside. Storm and wind blow me far away." The cloud explained its weakness.
"Then, let's live with us on the earth. You are also clean, beautiful and wise. Don't you feel like going there?" Ramu put forward his queries. The cloud smiled and said, "I also like the earth, and its tall white mountains, green forests and beautiful environment very much, but I can't stay there for long."
इतक्यात थंड वाऱ्याची झुळूक आली, रामू आणि मेघ दोघेही थरथरू लागले. 
"का थरथरत आहेस? तुला पण थंडी वाटते का?" 
रामूने विचारले.


"मी बाहेरून जितका सुंदर दिसतो तितकाच मी आतून कमकुवत आहे. वादळ आणि वारा मला खूप दूर नेत आहेत." 
मेघाने आपली कमजोरी समजावून सांगितली.


"मग आपण पृथ्वीवर आपल्यासोबत राहू या. तूही स्वच्छ, सुंदर आणि शहाणा आहेस. तिकडे जावंसं वाटत नाही का?" 
रामूने आपले प्रश्न मांडले. 
मेघ हसला आणि म्हणाला, "मलाही पृथ्वी आवडते आणि तिचे उंच पांढरे पर्वत, हिरवीगार जंगले आणि सुंदर वातावरण खूप आहे, पण मी तिथे जास्त वेळ राहू शकत नाही."
"What? Do you also go to the earth? Where do you stay there?" Ramu interrupted.
"Yes, Ramu. I have in fact come from there. I keep travelling moving from the earth to the sky."
Ramu was surprised on hearing this. The cloud I was going on with its talks.
"काय? तुम्ही पण पृथ्वीवर जाता का? तिथे कुठे राहता?" 
रामूने अडवलं.


"हो, रामू. मी खरं तर तिथूनच आलो आहे. मी पृथ्वीवरून आकाशात फिरत राहतो."


हे ऐकून रामूला आश्चर्य वाटले. 
मेघ मी त्याच्या बोलण्याने चाललो होतो.
 "When the heat of the sun strikes on the sources of water like rivers, lakes and ponds, the heated water becomes steam and blows up to the sky and stays here in my form. When I start getting cold, I again jump down to the earth in the form of water. This is what you all call rain."
Ramu now understood everything but he felt sad at the cloud's talks. "The cloud always smiles in spite of its trouble of moving and down but I always quarrel with my mother and cry. Now onwards I will also always smile like the cloud," Ramu promised himself.
"जेव्हा सूर्याची उष्णता नद्या, तलाव आणि तलाव यांसारख्या पाण्याच्या स्त्रोतांवर आदळते, तेव्हा गरम झालेले पाणी वाफेचे बनते आणि आकाशात उडते आणि माझ्या रूपात येथेच राहते. जेव्हा मला थंडी पडू लागते तेव्हा मी पुन्हा खाली उडी मारतो. 
पाण्याच्या रूपात पृथ्वी. यालाच तुम्ही सर्व पाऊस म्हणतो."


रामूला आता सगळं समजलं होतं पण मेघाच्या बोलण्याने त्याला वाईट वाटलं. 
"मेघ नेहमी हसत असतो त्याला हलताना आणि खाली येण्याचा त्रास असला तरी मी नेहमी माझ्या आईशी भांडतो आणि रडतो. आता पुढे मी देखील नेहमी मेघासारखा हसत राहीन," रामूने स्वतःला वचन दिले.
Again a cold wind blew. The smiling sun suddenlybdisappeared. The white, clean cloud also got black. "Now it's my time to go, Ramu. I will never forget you. You are my close friend..." As the cloud was shivering and saying this, a strong storm pushed him violently.
पुन्हा थंड वारा सुटला. 
हसणारा सूर्य अचानक दिसेनासा झाला. 
पांढरा, स्वच्छ ढगही काळा झाला. 
"आता माझी जाण्याची वेळ आली आहे, रामू. मी तुला कधीच विसरणार नाही. तू माझा जिवलग मित्र आहेस..." मेघ थरथर कापत असे म्हणत असतानाच एका जोरदार वादळाने त्याला जोरात ढकलले.
"No... No... let's talk for some more time." No sooner had he said this than Ramu felt a splash of cold water on his cheeks. 'Oh... how fast the cloud has changed its form and dropped as water,' Ramu thought.
"Get up fast, I say. Why is this boy so stubborn nowadays?" His mother's voice opened his eyes. The splash of water that he felt was not from the cloud but from his mother.
It was raining outside. Ramu went out wearing a raincoat to find the cloud he had just seen in his dreams.

"नाही... नाही... अजून थोडा वेळ बोलू." 
हे बोलताच रामूच्या गालावर थंड पाण्याचा शिडकावा जाणवला. 
'अरे... किती झपाट्याने ढग बदलला आणि पाण्यासारखा पडला,' रामूने विचार केला.


"उठ लवकर, मी म्हणतो. आजकाल हा मुलगा इतका हट्टी का आहे?" 
आईच्या आवाजाने त्याचे डोळे उघडले. 
त्याला जो पाण्याचा शिडकावा जाणवत होता तो ढगातून नसून त्याच्या आईचा होता.


बाहेर पाऊस पडत होता. 
रामू रेनकोट घालून त्याच्या स्वप्नात नुकताच पाहिलेला ढग शोधायला निघाला.

आदर्श जीवन जगण्यासाठी

☞ (०१) चूक झाली तर मान्य करा.
☞ (०२) समोरच्याचे मत विचारात घ्या.
☞ (०३) चांगल्या कामाची स्तुती करा.
☞ (०४) आभार मानायला विसरू नका.
☞ (०५) मी ऐवजी आपण शब्द प्रयोग करा.
☞ (०६) सतत हसतमुख रहा.
☞ (०७) दुसऱ्यातील चांगले गुण ओळखा.
☞ (०८) कुणाच्याही व्यंगावर हसु नका.
☞ (०९) स्वतःची कुवत व ताकद ओळखा.
☞ (१०) टिका तक्रार यात वेळ घालवु नका.
☞ (११) कृती पुर्व विचार करा.
☞ (१२) लोकांच्या खांद्यावर अपयश लादू नका.
☞ (१३) क्रोधावर नियंत्रण ठेवा.
☞ (१४) मैत्री भावना कायम मनी राहु द्या.
☞ (१५) नेहमी सत्याची कास धरा.
☞ (१६) इतरांना चांगली वागणूक द्या.
☞ (१७) विचार करून बोला.
☞ (१८) सुखाचा गुणाकार व दुखाचा भागाकार करा.
☞ (१९) वाहन चालवताना स्वतःची काळजी घ्या व फाजील आत्मविश्वास टाळा.
☞ (२०) कामापुर्ती मैत्री ठेउन खरी मैत्री गमाऊ नका.
कुटुंब  टिकवणे का महत्वाचे आहे ,,,,

Thursday, 6 July 2023

अभंग शेती

चैत्राचा वणवा सरताच थाट
वळीवाची वाट पाही बळी

लाही लाही होते तरी तो शेतात
खुरपे हातात घेऊनिया

येता आकाशात ढग काळेभोर
मनी नाचे मोर प्रत्येकाच्या

विरती ढेकळ कोसळता सरी
माती मऊ करी लोण्याहून 

पैरा करुनिया पेरणीची घाई 
सहाय्याला जाई धाउनिया

खुशीत डोलतो साधता पेरणी 
बाळ खुरपणी करावया

पिकाची काळजी सान बाळापरी 
निंदणी कोळपे घेत असे

पीक तरारून होई जेव्हा मोठे
उरे दोन बोटे स्वर्ग त्याला

सुगीचा दिवस पुढे येता येता 
होई सार्थकता जीवनाची
         *© चंद्रकांत निकाडे*
       पोहाळे, पन्हाळा, कोल्हापूर
                9922314564

Wednesday, 5 July 2023

अभंग

अभंग
अभंगांचे दोन प्रकार आहेत - 
१) चार चरणांचे आणि 
२) दोन चरणांचे. 
चार चरणांच्या अभंगाच्या पहिल्या तीन चरणांमध्ये प्रत्येकी ६ अक्षरे येतात, तर शेवटच्या चरणात चार अक्षरे आहेत. यासोबतच दुसऱ्या आणि तिसऱ्या चरणात श्लेषही आहे. चौथ्या चरणाचा विचार केला तर ते अभंगाला पूर्णत्व देते.
*आम्हा घरी धन | शब्दांचीच रत्ने* |
*शब्दांचीच यत्ने | करू शस्त्रे* 
दोन चरणांच्या अभंगाच्या प्रत्येक चरणात ८-८ अक्षरे येतात आणि शेवटी यमक साधले जाते.
*जे का रंजले गांजले* 
*त्यासी म्हणे जो आपुले*
*तोचि साधू ओळखावा* 
*देव तेथेच जाणावा*
याप्रमाणे एक प्रकार निवडून पुनर्लेखन व्हावे.

मातीचा सुगंध

.       *मातीचा सुगंध*

पाखरांची गाणी | तुकोबांची वाणी |
उन्ह, वारा रानी | सोबतीला ||

पेरणी घातीला | करावी तत्काळ |
नाही टाळाटाळ | करायाची ||

तीच भूमीमाय | सुगंध घामाचा |
आनंद कामाचा |  देई सदा ||

श्रावणी हिरवळ | फुलोऱ्याचा श्वास |
सणांची आरास | शीण जाई ||

विठूची आसक्ती | मायेची नजर |
वात्सल्या पाझर | रानोमाळ ||

धरित्रीच आम्हा | देई चारा, पाणी | जीवन कल्याणी | तिची आस ||

शेतातली फेरी | तीच असे वारी |
रोज येरझारी | चुको न दे ||

मातीत राबता | हातात भाकरी |
आईची चाकरी | धन्य जन्म ||
||

येणे सुखे बरे | जन्म चंदनाचा  |
झिजण्यासाठीच | पुन्हा व्हावा ||

             *© चंद्रकांत निकाडे*
           पोहाळे, पन्हाळा, कोल्हापूर.
                    9922314564

आषाढी-कार्तिकी

.          *आषाढी-कार्तिकी*

रब्बी खरिपाची | आषाढी-कार्तिकी |
जीवनी सार्थकी | वारी आम्हा ||

माथ्यावरी घाम | मोतीयाचे दान |
चंद्रभागा स्नान | घडे तेव्हा ||

खाण कष्टकऱ्या | आत्मिक शांतीची |
सावळ कांतीची | माय असे ||

भाळी लेऊ गंध | अबीर मातीचा |
चाबूक खांद्याचा | तोची वीणा

शेतात राबता | उन्हात पोळला |
*चंदन* जाहला | उभा देह ||

             *© चंद्रकांत निकाडे*
          पोहाळे, पन्हाळा, कोल्हापूर
                   9922314564

Tuesday, 4 July 2023

आम्ही शोधतो

आम्ही शोधतो उन्हात 
गार सावलीची झाडे
जातो सोडून घरटी
बांधावया मोठे वाडे

असता भूक भाकरीची 
खातो पाव पेटी-पेटी
पोट फुगले म्हणून
घेतो डॉक्टरांच्या भेटी

असते नेसायचे रोज
वस्त्र राखावया लाज 
तेही फाडून तोडून
चिंध्या पांघरतो आज

नको तितका हव्यास
जेव्हा भरवतो मनी
तेव्हा होतो अनायासे
दु:खी साम्राज्याचे धनी

              *रमेश*

गुलाब

दारी गुलाब फुलला
किती कौतुक सईला
होता प्राजक्ताचा सडा
कळ्या येताच जाईला
     मन चांदण्यात न्हाते
     थेट माहेराला जाते
     शाळकरीण गजरा
     वेणी मोगरा माळते
दाटलेल्या आठवणी
कळ्या-फुलांच्या श्वासात
झिम्मा फुगडी खेळली
सई श्रावण मासात 
     सायंकाळी गुलाबाच्या
     दीन पाकळ्या गळता
     वार्धक्याच्या कल्पनेने
     अश्रू थिजला खळता
दोन दिसांची सोबत
इतकाच सहवास
उद्यापासून कळ्यांची
स्वप्ने वास्तवाचे भास
     गाली गुलाब फुलेल
     सये नको रुसू बाई
     बघ मुराळी धाडेल
     उचकता तुला आई.
सये... 
       *_©छाया चंद्रकांत_*

Monday, 5 June 2023

राघू आंब्याचे झाड

शेतात आमच्या आहे एक 
राघू आंब्याचे झाड
फांद्या त्याच्या लांब लांब 
आणि बुंधा जाड

उंच फांदीवर कावळ्याचे घर
ढोलीत घुबड, पोपट 
राखणीसाठी आजोबा घालतात 
झाडाखाली खोपट

शिवारातले दमले भागले 
लोक सावलीस येतात
आसपासची जनावरेही
उन्हात विसावा घेतात

मार्चमध्ये झाडाभोवती 
मधमाशांची गर्दी
कोण देत असेल त्यांना 
मोहर आल्याची वर्दी

मुहूर्तमेढीला त्याचीच फांदी
बेंदराच्या तोरणाला पाने
बुलबुल, कोकीळ बसून तिथे 
गात असतात गाणे

आई सांगते, "आजोबांनी लावले 
म्हणून खाता फळे
आपण लावावे नातवांसाठी 
हे का तुम्हा ना कळे?"

                ©  *अनुतनय*

Wednesday, 31 May 2023

समीक्षा

  • आदिबंधात्मक समीक्षा
  • आस्वादक समीक्षा
  • कलावादी समीक्षा
  • भाषाशास्त्रीय समीक्षा
  • मानसशास्त्रीय समीक्षा
  • समाजशास्त्रीय समीक्षा
  • साहित्य समीक्षा
  • सौंदर्यवादी समीक्षा

Saturday, 20 May 2023

काफिया : पाठ, गाठ, वाट, भाट, घाट, ताट, थाट
रदीफ : गेले
वृत्त : प्रसूनांगी.
लगावली: गा गा ल गा ल गा गा गा गा ल गा ल गा गा

सारेच सारथीही सोडून पाठ गेले
हातातल्या लगामी, तोडून गाठ गेले

आले कसे कळेना, मार्जार पावलांनी 
जाता स्वतः दुखंडे, खोडून वाट गेले

होते किती करंटे, स्वार्थी, उनाड भोंदू
नाती नव्या जगाशी जोडून भाट गेले

वार्ता सुखावल्याची सांगून काल वेडे
वाटेतले प्रवाशी फोडून घाट गेले

मी राहिलो उपाशी ते तेल तूप सारे
मांडून ठेवलेले झोडून ताट गेले

झाले बरे म्हणा ना आता कशास चिंता
कोणी उजाड रानी मोडून थाट गेले
           
                                चंदन

Tuesday, 16 May 2023

जिवनाची जिगिषा

.                  जिवनाची जिगिषा
संकटाच्या दर्‍या
खोरी पार करताना
पाठीवरील तुझा हात
आणि
'कठीण...! कठीण...!!
अजून कठीण...!!!'
हे हुंकार 
जीवनातील उमेद
लढण्याची जिगिशा
जय-पराजयापलीकडील तटस्थता
वैराग्याचे अंतिम सत्य 
पायरीपायरीने 
उत्साह वाढविणारा आत्मविश्वास 
मदनदाह ओसरत असल्याची 
साक्ष तर देत नव्हता ना!

आंतरिक परिपूर्णतेच्या 
वारूवर स्वार होऊन
रितेपणाचा सागर 
पार करण्याचे गूढ मंत्र
देत होते
हे कळूनही
भटकणारे आत्मे
विलग कधीच नव्हते...!
नाहीत...!!
नसावेत...!!!

रमेश 

Sunday, 14 May 2023

विशिष्ट स्थितीत हत्तींच्या वर्तणुकीवर त्याच्या स्वभावाचा अंदाज बांधण्याची कसब असलेले, हत्ती अभ्यासक आनंद शिंदे

१५ मे हा विशिष्ट स्थितीत हत्तींच्या वर्तणुकीवर त्याच्या स्वभावाचा अंदाज बांधण्याची कसब असलेले, हत्ती अभ्यासक आनंद शिंदे यांचा वाढदिवस.

आनंद शिंदे ह्यांना जग “द एलिफन्ट व्हिस्परर” म्हणून ओळखतं. वृत्तपत्र छायाचित्रकार ते चक्क हत्तींशी संवाद साधणारा एक अचाट माणूस म्हणजे आनंद शिंदे! आपल्याला फक्त चित्कारच ठाऊक आहे, पण हत्ती दहा प्रकारचे आवाज काढतो. तो माणसासारखा रागावतो, चिडतो आणि रडतोसुध्दा. त्याचे सुळे तीक्ष्ण असतात, ते राकट गेंड्याची कातडी सहज फाडू शकतात. हत्तीचे पिल्लू तब्बल २२ महिने आईच्या पोटात असते, ते जन्मते तेव्हा त्याचे वजन शंभर किलोहून अधिक असते... हत्तीबद्दलची अशी सुरस आणि अज्ञात माहिती पुढे आणली आहे, हत्तीभाषेचे जाणकार आनंद शिंदे यांनी. 
आनंद शिंदे मूळ ठाण्याचे आहेत. केरळात बदली झाली असताना त्यांनी हत्तीच्या फोटो प्रोजेक्टचे काम सुरू केले. छायाचित्रणाची अतिशय आवड असणारे आनंद शिंदे हे छायाचित्रकार-पत्रकार म्हणून काम करत होते आनंद शिंदे हे वृत्तपत्र छायाचित्रकार म्हणून काम करत असताना कामासाठी त्यांचे जवळजवळ संपूर्ण भारतभ्रमण होत असे. त्यांची छायाचित्रे कायम वृत्तपत्रांत प्रसिद्ध होत असत.त्यांच्या अनेक छायाचित्रांसाठी त्यांना राष्ट्रीय पुरस्कार देखील मिळाले आहेत. पण ह्यात मध्येच हत्तींशी संवाद साधणे कसे सुरु झाले हा प्रश्न सगळ्यांनाच पडतो.
त्यांच्या कामाच्या निमित्ताने त्यांना एकदा केरळला जावे लागले. केरळात असताना त्यांनी कलरीपयट्टू आणि कथकलीवर फिचर स्टोरी करण्याचे ठरवले. ही स्टोरी करत असताना त्यांची हत्तीशी गाठ पडली. तेव्हापासून आनंद हे हत्तींचे मित्र बनले. हत्तींनी त्यांचं पूर्ण जगच व्यापून टाकलं.
खरं तर आनंद ह्यांना लहानपणापासूनच प्राण्यांविषयी आकर्षण होते. आपल्याही घरात आपला एखादा प्राणीमित्र असावा अशी त्यांची इच्छा होती. पण त्यांच्या घरी एकही प्राणी नव्हता.
एकदा त्यांनी त्यांच्या वडिलांना कुत्रा पाळायचा का असे विचारले तेव्हा “कुत्रा पाळणे सोपे नाही. त्यासाठी खूप खर्च होतो.” असे त्यांच्या वडिलांनी त्यांना सांगितले. त्यामुळे “एकतर तुझे शिक्षण होईल किंवा कुत्रा येईल” दोन्हीही होणे शक्य नाही असे वडिलांनी सांगितले. वडिलांचे हे उत्तर ऐकल्यावर त्यांनी घरात प्राणी पाळण्याविषयी एकदाही विषय काढला नाही.
तर फोटो फिचर करण्यासाठी आनंद जेव्हा केरळला गेले तेव्हा त्यांनी तिथला “त्रिचूर” हा प्रसिद्ध फेस्टिव्हल त्यांच्या कॅमेऱ्यात कैद केला.
त्यांना तेव्हा मल्याळी भाषा येत नव्हती. त्या फेस्टिव्हलमध्ये आनंद ह्यांनी पहिल्यांदाच हत्तींचे फोटो काढले. आनंद त्या फेस्टिव्हलमध्ये एकामागे एक असे शिस्तीत रांगेत उभे असलेले हत्ती बघतच राहिले.हत्ती हा ताकदवान प्राणी असतो पण त्याचे हृदय किती मऊ असते ह्याचा अनुभव ह्याची देही ह्याची डोळा आनंद ह्यांनी घेतला. एका हत्तीचा माहूत त्या हत्तीच्या पायाला सारखं टोचून त्याला पुढे पुढे जाण्यास भाग पाडत होता.
सारखे सारखे टोचल्यामुळे बिचाऱ्या हत्तीच्या पायाला जखमा झाल्या होत्या. पण बिचारं मुकं जनावर ते! स्वतःला झालेलं दुःख तोंडाने बोलून सांगू शकत नाही म्हणून ते इतरांनाही कळू नये? तरीही हत्ती बिचारा माहूतावर चिडला नाही.
ह्याउलट जेव्हा माहुताला तीव्र उन्हाचे चटके बसू लागले, तेव्हा त्याच हत्तीने त्याच्या पाय जखमी करणाऱ्या माहुताला स्वतःच्या चार पायांमध्ये असलेल्या जागेत चक्क बसायला जागा दिली.
म्हणजे हत्ती किती हुशार असतो शिवाय त्याला भावना असतात आणि त्या कळतात तसेच हत्तीचे हृदय एखाद्या निरागस बाळाप्रमाणे मऊ असते आणि त्याच्या आकाराकडे आणि ताकदीकडे बघून त्याला घाबरण्याची गरज नाही हे आनंद ह्यांना कळले.
हत्ती ह्या प्राण्याने आनंद ह्यांना झपाटून टाकले होते. हत्तीच्या आयुष्याबद्दल त्यांना अनेक नवननवीन गोष्टी कळत गेल्या.
एका जखमी पिल्लाचे निरीक्षण करताना हत्तींची संवादभाषा असते, त्यांच्यात रुसवे, फुगवे असतात, संवेदना असतात हे त्यांच्या ध्यानात आले. तिथून त्यांच्या हत्तींशी गप्पा सुरू झाल्या. 
त्या आधारावर देशभरात अनेक ठिकाणी नियंत्रणाबाहेर गेलेल्या हत्तींशी विशिष्ट पद्धतीने संवाद साधून, त्यांच्याशी जवळीकता करून त्यांना कह्यात आणण्यात यश मिळवले. त्यामुळेच त्यांना एलिफंट अंकल असेही संबोधले जाते. हत्ती म्हणजे मारकुंडा, थयथयाट करणारा, जीव घेणारा म्हणून जी प्रतिमा समाजात आहे, ती बदलून हत्तीविषयीची आत्मियता वाढावी यासाठी आनंद शिंदे यांची 'ट्रंक कॉल, दी वाईल्ड लाइफ फाऊंडेशन' ही संघटना काम करते. श्रिया पाटील ह्या आनंदच्या पत्नी आहेत. आनंदनी जेव्हा श्रिया ह्यांना सांगितले की ते हत्तीशी बोलतात, तेव्हा त्यांचा विश्वास बसला नाही. पण हळूहळू त्यांनाही अनुभव येत गेले आणि त्यांचा विश्वास बसला. त्यांना कळले की आता हेच आनंद ह्यांचे ध्येय आहे. त्यामुळे त्यांनी आनंद ह्यांना आश्वस्त केले की,
“तुम्ही तुमच्या ध्येयावर लक्ष केंद्रित करा. संसाराची आर्थिक बाजू मी सांभाळेन.”
*#संजीव_वेलणकर पुणे.*
९४२२३०१७३३
संदर्भ.इंटरनेट
ही व इतर पोस्ट माझ्या फेसबुक पेजवर पाहू शकता.

Sunday, 2 April 2023

प्रश्नांची काठिण्य पातळी भेदनक्षमता व विस्तार

विषय खूप मोठा; संक्षिप्त मुद्दे :
एखादा प्रश्नसंच समोर आला तर सर्वच पातळीवरील विद्यार्थ्यांना आनंद आणि समाधान मिळालेच पाहिजे. 
*मी पास होणार हे अति सामान्य विद्यार्थ्याला आनंदाने सांगता आले पाहिजे आणि कुशाग्र बुद्धीच्या मुलालाही मी हा सर्व प्रश्नसंच सोडवू शकतोच असा आत्मविश्वास आला पाहिजे हे खऱ्या प्रश्नसंचाचे वैशिष्ट्य असते.*
आपल्याकडे प्रश्नांची निवड प्राश्निकाच्या इच्छेनुसार होते. प्राथमिक आपल्या बुद्धिमत्तेच्या स्तराचे प्रदर्शन मांडत असतो. त्यामध्ये सर्व पातळीवरील विद्यार्थ्यांचा विचार केला जात नाही. विश्लेषण केले जात नाही. त्यामुळे असे घडते.
*मी पास होणार हे अति सामान्य विद्यार्थ्याला आनंदाने सांगता आले पाहिजे आणि कुशाग्र बुद्धीच्या मुलालाही मी हा सर्व प्रश्नसंच सोडवू शकतोच असा आत्मविश्वास आला पाहिजे हे खऱ्या प्रश्नसंचाचे वैशिष्ट्य असते.* 
*सामान्य विद्यार्थ्याचे "मी परीक्षेत पास/उत्तीर्ण झालो" हे समाधान प्रश्निकाचे व कसोटी आयोजित करणाऱ्याचे कोणतेच नुकसान करीत नाही.*
*स्टनाईनप्रमाणे त्या प्रश्नाची भेदनक्षमता असलीच पाहिजे.*
विस्तार, काठिण्य पातळी, भेदनक्षमतेनुसार प्रश्नांची निवड खालील प्रमाणे केली पाहिजे असे शिक्षणतज्ज्ञांनी सांगितलेले आहे. 
१.५ खूप सोपे
३.५ अधिक सोपे
११ सोपे
१७ सर्वसाधारण 
३४ मध्यम
१७ कठीण
११ थोडे कठीण 
३.५ जास्त कठीण
१.५ खूप कठीण

SMART Question
Simple
Measurable
Atractive
Right
Trusted
भाषाशास्त्र आणि भाषेच्या तत्त्वज्ञानामध्ये प्रश्नांचा मोठ्या प्रमाणावर अभ्यास केला जातो . व्यावहारिकतेच्या उपक्षेत्रात , प्रश्नांना अविवेकी कृत्ये मानले जातात जे प्रवचनात सोडवल्या जाणार्‍या समस्येचे निराकरण करतात . पर्यायी शब्दार्थ किंवा जिज्ञासू शब्दार्थ यांसारख्या औपचारिक शब्दार्थांच्या दृष्टीकोनांमध्ये , प्रश्नांना प्रश्नार्थकांचे निरूपण मानले जाते आणि सामान्यत: त्यांची उत्तरे देणार्‍या प्रस्तावांचे संच म्हणून ओळखले जातात.
भाषिकदृष्ट्या, प्रश्न तीन स्तरांवर परिभाषित केला जाऊ शकतो.

शब्दार्थाच्या स्तरावर , प्रश्न तार्किकदृष्ट्या संभाव्य उत्तरांचा संच स्थापित करण्याच्या क्षमतेद्वारे परिभाषित केला जातो. [१]

व्यावहारिकतेच्या पातळीवर , प्रश्न हा भाषण कायद्याची एक अविवेकी श्रेणी आहे जी पत्त्याकडून माहिती मिळविण्याचा प्रयत्न करते. [१]

वाक्यरचनेच्या स्तरावर , प्रश्नार्थक हा एक प्रकारचा खंड आहे जो प्रश्नांशी वैशिष्ट्यपूर्णपणे संबंधित असतो आणि विशिष्ट व्याकरणाच्या नियमांद्वारे परिभाषित केला जातो (जसे की विषय- इंग्रजीमध्ये सहायक व्युत्क्रम ) जे भाषेनुसार बदलतात.

काही लेखक या व्याख्या एकत्र करतात. प्रोटोटाइपिकल प्रश्न (जसे की "तुमचे नाव काय आहे?") तिन्ही व्याख्या पूर्ण करतील, त्यांचे ओव्हरलॅप पूर्ण होत नाही. उदाहरणार्थ "मला तुमचे नाव जाणून घ्यायचे आहे." व्यावहारिक व्याख्या पूर्ण करते, परंतु शब्दार्थ किंवा वाक्यरचना नाही. फॉर्म आणि फंक्शनच्या अशा विसंगतींना अप्रत्यक्ष भाषण क्रिया म्हणतात .
प्रश्नांचा मुख्य वापर म्हणजे वक्त्याला (किंवा लेखक) हवी असलेली माहिती सूचित करून संबोधित केलेल्या व्यक्तीकडून माहिती मिळवणे. [२]

थोडासा प्रकार म्हणजे डिस्प्ले प्रश्न , जिथे अॅड्रेसीला आधीच स्पीकरला माहीत असलेली माहिती तयार करण्यास सांगितले जाते. [३] उदाहरणार्थ, एखादा शिक्षक किंवा गेम शो होस्ट "ऑस्ट्रेलियाची राजधानी काय आहे?" विद्यार्थी किंवा स्पर्धकाच्या ज्ञानाची चाचणी घेण्यासाठी.

एक दिशा प्रश्न असा आहे जो तथ्यात्मक माहितीऐवजी सूचना शोधतो. हे विशिष्ट ("माहिती") प्रश्नापेक्षा वेगळे आहे कारण वैशिष्ट्यपूर्ण प्रतिसाद हे घोषणात्मक विधानाऐवजी निर्देश आहे. [१] उदाहरणार्थ:

उत्तर: मी तुमची भेट कधी उघडू?
ब: आता उघडा.
प्रश्न अनेक अप्रत्यक्ष भाषण कृतींसाठी आधार म्हणून देखील वापरले जाऊ शकतात. उदाहरणार्थ, अत्यावश्यक वाक्य "मीठ पास करा." सुधारित केले जाऊ शकते (काहीसे अधिक विनम्रपणे):

तुम्ही मीठ पास कराल का?
ज्यामध्ये चौकशीचे स्वरूप आहे, परंतु निर्देशाची अस्पष्ट शक्ती आहे.

वक्तृत्वात्मक प्रश्न हा शब्द अनेक प्रश्नांच्या वापरासाठी वापरला जाऊ शकतो जेथे वक्ता उत्तर शोधत नाही किंवा त्याची अपेक्षा करत नाही (कदाचित उत्तर गर्भित किंवा स्पष्ट आहे म्हणून), जसे की:

त्याचे मन हरवले आहे का?
मी तुम्हा सर्वांना इथे का आणले आहे? मला समजावून सांगा...
ते बंद आहेत? पण वेबसाइट 10 वाजेपर्यंत सुरू असल्याचे सांगितले.
लोड केलेले प्रश्न ( जटिल प्रश्नांची एक विशेष केस ), जसे की "तुम्ही तुमच्या पत्नीला मारहाण करणे थांबवले आहे का?" विनोद म्हणून किंवा श्रोत्यांना लाज वाटण्यासाठी वापरला जाऊ शकतो, कारण एखादी व्यक्ती देऊ शकेल असे कोणतेही उत्तर त्याला पुष्टी देण्याच्या इच्छेपेक्षा अधिक माहिती सूचित करेल.
प्रश्नांचे मुख्य अर्थशास्त्रीय वर्गीकरण तार्किकदृष्ट्या संभाव्य उत्तरांच्या संचानुसार आहे जे ते मान्य करतात. एक खुला प्रश्न, जसे की "तुमचे नाव काय आहे?", अनिश्चितपणे अनेक संभाव्य उत्तरांना अनुमती देते. एक बंद प्रश्न मर्यादित संख्येच्या संभाव्य उत्तरांना मान्य करतो. बंद केलेले प्रश्न पुढे होय-नाही प्रश्न (जसे की "तुम्हाला भूक लागली आहे का?") आणि पर्यायी प्रश्न (जसे की "तुम्हाला जाम किंवा मुरंबा हवा आहे का?") मध्ये विभागले जाऊ शकतात.

या वर्गांमधील फरक व्याकरणानुसार केला जातो. इंग्रजीमध्ये, खुले आणि बंद प्रश्नोत्तरे हे अनुक्रमे खुल्या आणि बंद प्रश्नांशी वैशिष्ट्यपूर्णपणे संबंधित भिन्न खंड प्रकार आहेत.

Wednesday, 1 March 2023

जगातील महान व्यक्ती या वाचनातूनच घडलेल्या आहेत " संमेलनाध्यक्ष चंद्रकांत निकाडेसर.

" जगातील महान व्यक्ती या वाचनातूनच घडलेल्या आहेत " संमेलनाध्यक्ष चंद्रकांत निकाडे सर. ' जगभरचे अवलोकन केले तर नावावरुपास आलेल्या महान व्यक्ती या वाचनातूनच घडलेल्या आहेत. त्यांनी आपली जबाबदारी ओळखून आपल्या लेखनातून इतरांना घडण्याची प्रेरणा दिली. प्राचीन काळातील अनेक धर्मग्रंथ ,साहित्य यातील प्रसंग घटना संकल्पना या खऱ्या अर्थाने साहित्य निर्मितीच्या जननी, जन्मदात्री आहेत. आपल्या भारत देशाला फार मोठी प्राचीन संस्कृती लाभली आहे. भूतकाळाचे वर्तमान काळाशी सांगड घालण्याचे महान सामर्थ्य अनेक ग्रंथांमध्ये आहे. ही ग्रंथसंपदा, साहित्य संपदा आपणास व आपल्या अनेक पिढींना सदैव मार्गदर्शक आहेत. हा अनमोल ठेवा आहे. मुखोद्गगत साहित्य कालांतराने बदलते. पण मुद्रित लेखनाचा ठेवा चिरंतन राहतो. साहित्य हे शब्दरूप असते आणि शब्दांच्या द्वारा साहित्याचा अविष्कार होतो. अतिउच्च दर्जाचे साहित्य आज आपल्या मराठी भाषेत उपलब्ध आहे. ही साहित्य संपदा ज्ञानाचे मार्ग उघडून देते व आपणास समृद्ध बनवते.' असे विचार प्रसिद्ध ज्येष्ठ बालसाहित्यिक चंद्रकांत निकाडे सर यांनी सृजनशक्ती श्रमिक फाउंडेशन संचलित सृजनशक्ती साहित्य विचार मंचचे बारावे ग्रामीण युवा मराठी साहित्य संमेलन चिंचवाड ता. करवीर येथे संमेलनाध्यक्षपदी बोलत असताना आपले विचार व्यक्त केले. संमेलनाचे उद्घाटक डॉ बी. एम. हिर्डेकर यांनी 'वाचनाच्या छंदामुळेच माणसाचे व्यक्तिगत जीवन संपन्न होते. चांगल्या ग्रंथाचे वाचन हे नेहमी आपल्या जीवनास हितकारक ठरते. विविध ग्रंथांचे वाचन असो वा साहित्याच्या वाचनाने ज्ञानरूपी सागर तुडुंब आपल्यात भरतो. इतिहास, तत्त्वज्ञान संस्कृतीचा प्रवास केल्याचा आनंद ग्रंथ देतो. वाचणाऱ्याला नव्या युगाचे गीत गाता येते. ' ‌ या कार्यक्रमात स्वागताध्यक्ष चिंचवाडचे युवा उद्योजक राहुल कुमार पाटील हे होते. आपल्या भाषणात ते म्हणाले,' मी स्वतः चिंचवाड हायस्कूल, चिंचवाड चा विद्यार्थी असल्याने मला साहित्य संमेलनाचे स्वागताध्यक्ष पद दिल्याने खूप आनंद होतो आहे. प्रत्येक व्यक्तीने, विद्यार्थ्यांने व वाचकाने शाळेच्या ग्रंथालयातील पुस्तकांचा व त्यातील विचारांच्या खाद्याचा आस्वाद घ्यावा. मी उद्योजक असलो तरी शिक्षकांच्या विचारातून प्रेरणा घेऊन आज इथेपर्यंत पोहोचलो आहे. लहानपणीच आई व वडिलांच्या निधनानंतर मामांनी पालनपोषण केले. शिक्षकांच्या विचारातून जीवनात संघर्ष करायला शिकलो. " ‌. कार्यक्रमाची सुरुवात ग्रंथ दिंडीने झाली. प्रकाश देसाई सरांच्या हस्ते ग्रंथ दिंडी सोहळ्याचे उद्घाटन करण्यात आले. यास माजी सरपंच सुदर्शन उपाध्ये उपस्थित होते. या प्रसंगी सृजनरत्न ग्रंथमित्र पुरस्कार मुरगुड चे सर्वोदय चे कार्यकर्ते भिमराव कांबळे तर सृजनरत्न आदर्श शिक्षक पुरस्कार सुचेता चौगुले यांना प्रदान करण्यात आले. डॉ. विनोद कांबळे यांच्या अध्यक्षतेखाली 'पुस्तके फक्त विचार पेरतात' या बीजभाषणात भिमराव कांबळे, वैशाली देसाई, व राजलक्ष्मी जाधव, आश्लेषा पेठकर, आकांक्षा घाटगे, जान्हवी मोहिते, अनुष्का जाधव व दिग्विजय सुतार यांनी आपले मनोगत व्यक्त केले. त्या बरोबरच कविश्री किरण पंडितराव पाटील यांची प्रकट मुलाखत हर्षवर्धन कांदेकर, जानवी आंबी, केवल पाटील यांनी घेतली. आपल्या मुलाखतीमध्ये त्यांनी बालपणापासून अनेक विचार मांडले. आपल्यासारख्या व्यक्तीच्या आयुष्यात बालपणाच्या भावविश्वाला महत्त्वाची जागा असते, आपले स्वतःचे बालपण आणि तो सगळा काळ आपल्याला या क्षणी कसा आठवतो. आपली कौटुंबिक 🌹पार्श्वभूमी व बालपणातले काही ठेवणीतल्या चीजा त्यांनी आपल्या मुलाखतीतून प्रकट केले. वाचण्याची आवड कशी रुजली व त्यातून आपणास कशी प्रेरणा मिळत गेली याचेही अत्यंत सुंदर व समर्पक असे उत्तर दिले. कोल्हापूर जिल्ह्यात सांस्कृतिक आणि वाङमयीन वातावरण फार चांगले आहे. वि. स. खांडेकर, शिवाजी सावंत, रणजीत देसाई, डॉ. आनंद यादव व सध्याचे डॉ. सुनील कुमार लवटे सर, कृष्णात खोत सर अशांच्या माध्यमातून अनेक सांस्कृतिक व वाङ्मयीन उपक्रम कसे सुरू झाले व आपण यात कितपत सहभागी झालो याची त्यांनी माहिती सांगितली. आपले माध्यमिक स्तरावरचे शिक्षण चिंचवाड हायस्कूल चिंचवाड मध्ये कसे झाले त्याबद्दल त्यांनी सर्व विद्यार्थ्यांना प्रेरणादायक माहिती दिली.कथाकथनाच्या सत्रात रुकडी येथील दीपक गायकवाड यांनी लगीन ही कथा सादर केली. चिंचवाड हायस्कूल चिंचवाड चे मुख्याध्यापक श्रेणिक पाटील हे अध्यक्षस्थानी उपस्थित होते. या कार्यक्रमात विशेष पुरस्कार प्रज्ञा देसाई व शितल पाटील इंजिनिअर यांना प्रदान करण्यात आले. या कार्यक्रमासाठी प्रमुख उपस्थिती दीपक मगदूम, मयुरी बोरगावकर, रणजीत जाधव, सतीश चराटे, प्रताप पाटील, संकेत खुरपे, अशोक पाटील ,प्रियंका पाटील, सुभाष पाटील ,वर्षा मोहन पाटील, वर्धमान धनपाल पाटील हे उपस्थित होती. या कार्यक्रमाचे आयोजन सृजन शक्ती श्रमिक फौंडेशन कोल्हापूर चिंचवाड चे संस्थापक अध्यक्ष संजय पाटील. सचिव सौ. नयना पाटील. समन्वयक अंकित सुतार, रावसाहेब खोत, आप्पासाहेब पाटील, सागर पाटील, राजकुमार पाटील यांनी केले. स्वागत, प्रस्तावना व ओळख संजय पाटील तर सूत्रसंचालन संजय वारके, अंकित सुतार, अश्विनी पाटील, स्वाती पुजारी, नयना पाटील यांनी केले व आभार प्रा. संदीप पाटील सर यांनी केले.

Tuesday, 24 January 2023

Gazal परीक्षा

का परीक्षा आज घ्यावी वाटले?
सूर येता साथ द्यावी वाटले?

कोणत्या वाटेत काटा टोचता
सोबतीला मी असावी वाटले?

कैकदा गेलास नाका टाळुनी
पावती केव्हा भरावी वाटले?

भोगला संसार अर्धा अन् आता
कोणत्या बाजूस डावी वाटले?

मृत्युच्या दाढेत का रे शेवटी
सोबतीला हाक द्यावी वाटले?

Monday, 23 January 2023

संस्कार

शिस्तीला नसता आई 
धाकाला नसता बाप
पोरांच्या करतुदीने
डोक्याला होतो ताप

संस्कृती कळण्यासाठी 
घरी एक असावी आजी
आजोबांच्या युक्तीने
कुणी मारून जातील बाजी

जाणत्या पिढीचे वैभव
नसतेच घराला अडगळ
प्रत्येक नव्या वाटेवर 
ते आपल्यासाठी आगळ

श्रावण नि पुंडलिकाने
जे जपले होते नाते
आईबापाचे महिमान
इतिहाशी उजळून जाते

संस्कार दुकानी नसतो
ना मिळतील देऊन नाणे
वर्तमान ठेवून साक्षी
थोरांचे गावे गाणे

        *© रमेश कुरलीकर*

Saturday, 14 January 2023

GAZAL-


पादाकुलक
८+८

दिवस बेगडी आले त्यांचे
जीवन बेचव झाले त्यांचे

शिळ्या कढीला देत फोडणी
वरती पडती घाले त्यांचे 

ओझे वाहत कर्ज भिकेचे 
खेचर रखडत चाले त्यांचे

पत्रावळीचे गठ्ठे तुंबून
तुडुंब भरले नाले त्यांचे

गांधारीसम बांधून पट्टी
पुन्हा हिनवती साले त्यांचे

लबाड सत्तेतील कोल्ह्यांनी 
पीठ मीठही खाल्ले त्यांचे

स्वप्ने विरली दिस मावळता
काळे माकड झाले त्यांचे

Friday, 13 January 2023

Gazal

ओलांडोनी❎ येत माप मी
केले नाही मोजमाप मी

ओलांडून✅

सर्वांमध्ये गुंतता अशी
विसरते मला कशी साफ मी

लगावली✅
पण उला पूर्ण वाक्य नसल्याने उला-सानी एक वाक्य वाटत आहे.. ते तसे नसावे. 

चुका खोडल्या उदार झाले
केले गफले❎ सलग माफ मी

शक्यतो मराठी शब्द वापरावा..

केले सलग माफ मी.. असे आपण म्हणत.. सलग हा शब्द अनावश्यक वाटतो. 

करते विचार मंगल दायक
का द्यावा मग, कुणा❎ शाप मी

कुणास✅ कुणाला✅

कांचन श्रीकृष्ण नेवे
चिंचवड

वरील रचनेत वरून आपणास कळते की;
१. उला आणि सानी हे दोन मिसरे स्वतंत्र आणि पूर्ण वाक्ये असावीत... 
२. प्रमाण शब्द वापरावेत. (ओलांडोनी ❎ ओलांडून✅)
३. शक्यतो मराठी शब्दच वापरावेत. 
४. व्याकरण शुद्ध असावे. 

शिकत असताना नेहमी वरील नियम पाळावेत... 

गजल आणि कवितेत हे मुलभूत फरक आहेत.. गजल ही शक्यतो जास्तीत जास्त प्रमाणित आणि शुद्ध असावी तर कवितेत आपण मीटर आणि लय येण्यासाठी शब्दांची मोडतोड किंवा व्याकरणाकडे दुर्लक्ष करू शकतो. अशा कविता सुद्धा अप्रतिम ठरतात. (अर्थात कवितेत सुद्धा शक्यतो हे नियम पाळायचा प्रयत्न करावा)  

आता आपण काफिया पाहू.. 
वरील रचनेत (तूर्तास शेर नको म्हणूयात)
काफिये हे स्वर काफिये आहेत..

काफिया स्वर काफिया आहे की नाही हे समजण्यासाठी आधी अलामत काय हे समजून घेतले पाहिजे.. 

गजलमधे... तीन गोष्टींना अनन्य साधारण महत्व आहे...

अलामत, काफिया, रदिफ.. 

रदिफ... मिस-यामधे एक शब्द किंवा शब्द समूह समान.. 
काफिया... शब्द आणि त्या शब्दात मधील एक किंवा काही अक्षरे समान)
अलामत.. अक्षराचा स्वर अंत (स्वरांत)

वरील उदाहरणात.. 

रदिफ..... 
सानी मिस-याचा शेवट मी ह्या शब्दाने केला असल्याने.  मी हा एक शब्द रदिफ ठरतो. 


काफिया... 
दोन प्रकारचे असतात.
१ शुद्ध काफिया  
२. स्वर काफिया..

*शुद्ध काफिया*
अशाप्रकारच्या काफिया मधे शब्दाचा शेवटी किमान एक अक्षर किंवा अनेक अक्षरं समान असतात. 

उदा. १
हरवून, मिसळून, तळपून, तुटून, बरळून, वगैरे.
वरील सर्व शब्द हे न ह्या अक्षराने शेवट होतात.. 

उदा. २. 
पाळल्याने, पाडल्याने, लागल्याने, गोंजारल्याने, ठेवल्याने... 
वरील शब्दात ल्याने ही समान अक्षरं आहेत.

*म्हणून हा काफिया शुद्ध काफिया ठरतो*

आता कांचनजींच्या रचनेतला काफिया पाहू. त्यांनी.. 
 माप, मोजमाप, साफ, माफ.
असा घेतला आहे. म्हणजेच ह्या शब्दसमूहाच्या शेवटी एकही अक्षर समान नाही..(प, प, फ, फ असा वेगळा वेगळा आहे) .. 

*म्हणून हा काफिया स्वर काफिया ठरतो.* 

*अलामत...*
म्हणजे.. काफियाच्या समान अक्षराच्या आधीच्या अक्षराचा स्वर अंत (स्वरांत)... 

आपण दोन उदाहरणांचा विचार करू आणि अलामत काय हे समण्याचा प्रयत्न करूया. 

*शुद्ध काफिया..*
उदा. १
हरवून, मिसळून, तळपून, तुटून, बरळून,

ह्यामधे समान अक्षर न आहे.. आणि
त्या आधीचे अक्षर.
- हर *वू* न= (व् + ऊ) = स्वर अंत ऊ आहे 
- मिस *ळू* न = (ळ् + ऊ) = स्वर अंत ऊ आहे.
- तळ *पू* न = (प् + ऊ) = स्वर अंत ऊ आहे. 
- तु *टू* न = (त् + ऊ) = स्वर अंत ऊ आहे. 

*म्हणजेच अलामत ऊ आहे.* 

उदा. २. 
पाळल्याने, पाडल्याने, लागल्याने, गोंजारल्याने, ठेवल्याने...

उदा. २.  
पाळल्याने, पाडल्याने, लागल्याने, गोंजारल्याने, ठेवल्याने...

वरील शब्दसमूहात ल्याने ही दोन अक्षरे समान आहेत तर त्या आधीची अक्षरं बदलत आहेत. 

- पा *ळ* ल्याने = (ळ् + अ) = स्वर अंत *अ* आहे
- पा *ड* ल्याने = (ड् + अ) = स्वर अंत अ आहे.
- ला *ग* ल्याने = (ग् + अ) = स्वर अंत अ आहे.
- गोंजा *र* ल्याने = (र् + अ) = स्वर अंत अ आहे. 
- ठे *व* ल्याने = (व् + अ) = स्वर अंत अ आहे. 

*म्हणजे अलामत अ आहे*


*स्वर काफिया*
उदा. ३.
माप, राख, गाव, साफ, माफ, टाक, 
ह्या शब्दसमूहात शेवटी एकही अक्षर समान नाही.. म्हणून हा काफिया स्वर काफिया आहे (वर आपण पाहिले)

माप = (प् + अ) .. स्वरांत अ
राख = (ख् + अ)... स्वरांत अ
गाव = (व् + अ).. स्वरांत अ
साफ = (फ् + अ).. स्वरांत अ
माफ = (फ् + अ).. स्वरांत अ
टाक = (क् + अ).. स्वरांत अ

म्हणून अलामत अ आहे, तर शेवटचे अक्षर समान नाही. 

उदा.२..
कावा, वाचा, मावा, दाता, स्वाहा..
ह्या शब्द समूहात 
अलामत आ असून हा स्वर काफिया ठरतो.. 

वरील उदाहरणांवरून आपणास. 
रदिफ, काफिया (शुद्ध आणि स्वर) तसेच अलामत काय हे कळेल.

गजलेच्या शेरात..
रदिफ =  नसला तरी चालतो
काफिया = हवाच. (शक्यतो शुद्धच म्हणजे शब्दाचा शेवट किमान एका तरी समान अक्षराने व्हावा)
अलामत = हवी म्हणजे हवीच 

अचूक आणि परिणामकारक अलामत आणि काफिया हे गजलचे सौन्दर्य वाढवतात..  

धन्यवाद

Friday, 6 January 2023

गझल-वेल सांजावता वाळला

वृत्त - वीरलक्ष्मी
२१२  २१२  २१२
कोणता कायदा पाळला?
सांग का वायदा टाळला?

राहते ती कुठे शेवटी
भाग थोडा जरी गाळला

मांडण्या आपली कुंडली  
एकही ग्रंथ ना चाळला

मोल त्याला कुठे माहिती 
कागदी मोहरा जाळला

स्वार्थ होता  अंतरी
जाणुनी फायदा टाळला

वाट होती अशी काटकी
तो पुन्हा जाणुनी टाळला

पाहता पावसा ये रडू
थांबला आसवे ढाळला

भूतकाळातले चांदणे 
मागता आसवे ढाळला

प्रेम वृंदावनी लाविला 
वेल सांजावता वाळला

मी पुन्हा मोगर्‍याचा तुरा
कालही स्वागता माळला


      चाँद परछाई